छत्तीसगढ़

गोवा और उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी Uniform Civil Code की तैयारी


छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया तेज कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति का ग…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 12:19:13 PM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 12:19:12 PM (IST)

गोवा और उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी Uniform Civil Code की तैयारी
समान नागरिक संहिता का अर्काइव विजुअल। अर्काइव

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं। यह समिति गोवा में लंबे समय से प्रभावी पुर्तगाली नागरिक संहिता और उत्तराखंड के नए यूसीसी कानून के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगी।

इसके साथ ही समिति गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में गठित समितियों से भी संपर्क कर समन्वय स्थापित करेगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, गुजरात और असम इसे विधानसभा में पारित कर चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया जारी है।

आदिवासियों को संवैधानिक संरक्षण

जनगणना 2011 के अुनसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति (आदिवासियों) का प्रतिशत लगभग 30.62% है। भारतीय संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची आदिवासियों की संस्कृति, रीति-रिवाजों और स्वायत्तता को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करती है। अधिकांश कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी को इन संवैधानिक गारंटियों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा।

उत्तराखंड में एसटी यूसीसी से बाहर

उत्तराखंड की यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार ने यह निर्णय उनकी अनूठी परंपराओं, विवाह प्रथाओं और स्थानीय रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया है। आदिवासी समुदायों में विवाह और संपत्ति के अधिकार अक्सर उनकी पारंपरिक ”रूढ़िवादी प्रथाओं” द्वारा शासित होते हैं, जो मुख्यधारा के कानूनों से काफी भिन्न होते हैं। इन समुदायों की पहचान उनकी इन्हीं विशिष्ट प्रथाओं से जुड़ी है। सूत्राें के अनुसार आदिवासियों की प्रथागत कानून प्रणाली की रक्षा के लिए विशेष ”अपवाद” या ”छूट” का प्रविधान किए जाने की प्रबल संभावना है। उन्हें किस हद तक छूट दी जाए, समिति इस पर भी काम करेगी।

गोवा के यूसीसी में लिंग समानता

गोवा की यूसीसी 1867 के पुर्तगाली कानून पर आधारित है और राज्य के सभी निवासियों पर धर्म से परे लागू होती है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता ‘सामुदायिक संपत्ति” है, जिसके तहत विवाह के बाद पति-पत्नी संपत्ति के समान भागीदार बन जाते हैं। तलाक या मृत्यु पर संपत्ति का आधा-आधा बंटवारा अनिवार्य है। उत्तराधिकार में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार प्राप्त हैं और माता-पिता अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को बाध्य हैं। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है और यह कानून व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जो लिंग समानता सुनिश्चित करता है।

उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप पर भी प्रविधान

उत्तराखंड के यूसीसी में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में सभी धर्मों के लिए एकसमान नियम निर्धारित करता है, जिससे पुत्र-पुत्री को संपत्ति में समान अधिकार मिलते हैं। राज्य में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। यह कानून लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है। यदि इस संबंध में बच्चा पैदा होता है, तो उसे कानूनी मान्यता और उत्तराधिकार के अधिकार प्राप्त होते हैं, जो महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है। यह बहुविवाह और एकतरफा तलाक जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करता है।

सक्रिय है राज्य सरकार

संविधान निर्माण के दौरान यूसीसी के लिए प्रयास करने का प्रविधान रखा था। गोवा के बाद अब उत्तराखंड ने इसे लागू किया है, और असम व गुजरात में भी इसका प्रारूप तैयार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है और अन्य राज्यों की आदर्श संहिता का अध्ययन किया जाएगा। समान नागरिक संहिता का लागू होना हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए एक बेहतर और सकारात्मक कदम है।

– अरुण साव, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़



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