घरघोड़ा श्मशान शेड बना कार पार्किंग का अड्डा, लकड़ियां खुले में झेल रहीं बारिश




रायगढ़ जिले के घरघोड़ा नगर क्षेत्र से जनसुविधाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी की बदहाली को उजागर करने वाली बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। इंसान की मृत्यु के पश्चात उसके अंतिम संस्कार के लिए सूखी लकड़ी जुटाना परिजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था होती है। इसी मानवीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा घरघोड़ा में दाह संस्कार हेतु सूखी लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए शेड का निर्माण कराया गया था। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह जनसुविधा वर्तमान में व्यक्तिगत वाहनों की पार्किंग का अड्डा बनकर रह गई है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जिस शेड को बारिश और नमी से लकड़ियों को बचाने के लिए बनाया गया था, उसके भीतर निजी चार पहिया वाहन (कार) पार्क कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, किसी दिवंगत के अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाई जाने वाली लकड़ियां शेड के बाहर खुले में बारिश की मार झेल रही हैं। जब कोई परिवार अपने किसी प्रियजन को खोकर गहरे शोक में डूबा होता है, ऐसे समय में अंतिम संस्कार के लिए सूखी लकड़ी का न मिलना परिजनों की पीड़ा को कई गुना बढ़ा देता है।
सार्वजनिक धन का उपयोग कर शेड का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि मानसून के सीजन में भी नागरिकों को दाह संस्कार के लिए सूखी और आसानी से जलने योग्य लकड़ी मिल सके। लेकिन वर्तमान में शेड का उपयोग निजी कार खड़ी करने के लिए किए जाने से पूरी व्यवस्था के औचित्य पर ही कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। नगरवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सार्वजनिक एवं मानवीय सरोकारों से जुड़ी जगह पर इस प्रकार का अतिक्रमण और लापरवाही आखिर किसकी शह पर हो रही है।
इस पूरे मामले में स्थानीय निकाय और नगर पंचायत प्रशासन की चुप्पी भी संदेह के दायरे में है। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लेने की जहमत उठाई है? स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि श्मशान घाट के शेड को तत्काल प्रभाव से खाली कराया जाए, वाहनों के अवैध पार्क करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और शेड के भीतर व्यवस्थित तरीके से सूखी लकड़ियों का भंडारण सुनिश्चित किया जाए ताकि दुख की घड़ी में किसी भी परिवार को भटकना न पड़े।

