छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुंगेली कोतवाली में वर्ष 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आठ आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया है। कोर्ट…और पढ़ें
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 10:33:18 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 10:33:18 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
- मुंगेली पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी।
- आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग।
- एसआईटी जांच में सभी आठ मामले निकले फर्जी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः हाई कोर्ट ने मुंगेली कोतवाली में दर्ज आपराधिक मामलों की कार्यवाही को रद कर दिया है। यह मामला 2019 से 2021 के बीच एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आठ आपराधिक मामलों से संबंधित है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) ने सभी मामलों को फर्जी करार दिया था।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने कहा कि किसी एक परिस्थिति को अलग से देखना उचित नहीं है। अदालत ने माना कि इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामलों में कई बार वही परिवारजन आरोपी बनाए गए। शिकायतकर्ताओं के बीच संबंध भी सामने आए।
2017 से सिलसिला, जिले भी अलग-अलग\
मामले की पृष्ठभूमि 2017 से शुरू होती है। याचिकाकर्ता शैलेंद्र लहरे और अन्य ने आरोप लगाया कि एक महिला का पियूष तिवारी नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ, जिसने खुद को अविवाहित पुलिस अधिकारी बताकर विवाह का भरोसा दिया। महिला के संबंध समाप्त करने के बाद उसके परिवार के खिलाफ अलग-अलग जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हुए।
हाई कोर्ट ने दी यह भी छूट
हाई कोर्ट ने एसआइटी की जांच के निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं किया, जिसमें सभी आठ अपराधों को फर्जी बताया गया। अदालत ने कहा कि किसी शिकायतकर्ता का किसी व्यक्ति से परिचित होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शिकायत झूठी है।
अंततः कोर्ट ने मुंगेली के अपराध को रद कर दिया और सभी संबंधित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया। याचिकाकर्ताओं को अन्य राहतों के लिए उचित मंच के समक्ष जाने की स्वतंत्रता दी गई है।
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