छत्तीसगढ़

डिजिटल अरेस्ट में पिता-पुत्र महाराष्ट्र से गिरफ्तार, साइबर ठगी के 54 लाख खाते में मिले


सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि साइबर अपराधियों ने एक वृद्ध महिला को वाट्सएप मैसेज और वीडियो काल के जरिए संपर्क किया। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिका …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 25 May 2026 11:32:24 PM (IST)Updated Date: Mon, 25 May 2026 11:38:41 PM (IST)

डिजिटल अरेस्ट में पिता-पुत्र महाराष्ट्र से गिरफ्तार, साइबर ठगी के 54 लाख खाते में मिले
डिजिटल अरेस्ट

HighLights

  1. इसके बाद महिला को मानसिक दबाव में रखकर तथाकथित डिजिटल अरेस्ट किया गया।
  2. गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खातों में एक करोड़ चार लाख 80 हजार रुपये जमा कराए।
  3. पीड़िता की शिकायत पर रेंज साइबर थाना में मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की गई।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रेंज साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बड़े साइबर फ्राड मामले में महाराष्ट्र के भंडारा जिले से पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया है। आरोपित के बैंक खाते में साइबर ठगी की 54 लाख 40 हजार रुपये की रकम मिलने के बाद उनकी संलिप्तता उजागर हुई। पुलिस दोनों आरोपित को गिरफ्तार कर बिलासपुर लाई है। मामले में अन्य आरोपित और पूरे साइबर नेटवर्क की तलाश जारी है।

सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि साइबर अपराधियों ने एक वृद्ध महिला को वाट्सएप मैसेज और वीडियो काल के जरिए संपर्क किया। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए महिला को डराया कि उसका नाम आतंकवादी संगठन से जुड़ा है और उसके खिलाफ कार्रवाई होने वाली है।

इसके बाद महिला को लगातार मानसिक दबाव में रखकर तथाकथित डिजिटल अरेस्ट किया गया। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में एक करोड़ चार लाख 80 हजार रुपये जमा करा लिए गए। पीड़िता की शिकायत पर रेंज साइबर थाना में मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान ICICI बैंक के एक खाते में 54 लाख 40 हजार रुपये ट्रांसफर होना पाया गया। इसके बाद आइजी राम गोपाल गर्ग, एसएसपी रजनेश सिंह और सीएसपी गगन कुमार के निर्देशन में निरीक्षक कामिल हक के नेतृत्व में टीम गठित कर महाराष्ट्र भेजा गया।

पुलिस ने महाराष्ट्र के भंडारा अंतर्गत गांधी वार्ड, वरठी में रहने वाले मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी और उसके पिता अब्दुल कयूम अंसारी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपित ने स्वीकार किया कि उसने दो प्रतिशत कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार खाते का उपयोग शेयर ट्रेडिंग फ्राड, आनलाइन फ्राड और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में किया जा रहा था।

कमीशन के लालच में बना म्यूल अकाउंट धारक

  • साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद नेमतउल्लाह मंसूरी साइबर अपराधियों को अपना बैंक खाता उपयोग करने देता था।
  • इसके बदले उसे कुल रकम का दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। पुलिस के मुताबिक ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।
  • डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्राड और ऑनलाइन ठगी में ऐसे खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है।
  • साइबर अपराधी सीधे अपने खातों का उपयोग नहीं करते, बल्कि कमीशन के लालच में लोगों के खाते किराये पर लेते हैं।
  • पुलिस का कहना है कि म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले भी साइबर अपराध में बराबर के आरोपित माने जाते हैं। रेंज साइबर थाना लगातार ऐसे खाताधारकों पर कार्रवाई कर रहा है।

काठमांडू जाकर अपराधियों को सौंपता था बैंक खाता

  • जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि आरोपित नेमतउल्लाह मंसूरी नेपाल के काठमांडू तक जाकर अपना बैंक खाता साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराता था।
  • पुलिस के अनुसार अंतरराज्यीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साइबर अपराधी नेटवर्क सक्रिय है।
  • आरोपित का पिता अब्दुल कयूम अंसारी भी इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और कमीशन के बदले मुख्य आरोपित से मोबाइल के जरिए लगातार संपर्क में था।
  • पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नेपाल में किन लोगों के माध्यम से बैंक खातों और साइबर ठगी के नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।
  • तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

ऐसे होता है डिजिटल अरेस्ट का साइबर जाल

  • डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का नया तरीका बनकर सामने आया है। इसमें ठग खुद को सीबीआईॅ, पुलिस, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं।
  • इसके बाद उन्हें किसी अपराध, मनी लान्ड्रिंग या आतंकवादी गतिविधि से जुड़ा होने का डर दिखाया जाता है। पीड़ित को लगातार निगरानी में रखने के लिए वीडियो काॅल चालू रखने कहा जाता है, जिससे वह मानसिक दबाव में आ जाता है।
  • फिर गिरफ्तारी, जेल या खाते सीज होने का भय दिखाकर रकम ट्रांसफर करा ली जाती है।
  • साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान वीडियो काॅल या जांच एजेंसी के नाम पर आने वाले फोन से डरें नहीं।
  • किसी भी तरह की धमकी मिलने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत करें।



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