छत्तीसगढ़

धमतरी में शांति समिति की बैठक: प्रार्थना सभा में अब ईसाई समाज के लोग ही शामिल होंगे, हिंदू मिले तो मतांतरण मानकर होगी कार्रवाई

धमतरी के कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में 16 सितंबर को शाम अपर कलेक्टर इंदिरा सिंह देहारी की अध्यक्षता में शांति समिति की बैठक हुई। बैठक में हिंदू संगठन के पदाधिकारी व ईसाई समाज के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब धमतरी जिले में शहर व गांवों में आयोजित ईसाइयों की प्रार्थना सभा में ईसाई समाज के लोग ही शामिल होंगे। हिंदू प्रार्थना सभा में शामिल नहीं हो सकते।

बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि प्रार्थना सभा में कोई भी हिंदू मिला, तो सीधे इसे मतांतरण मानकर प्रशासन से शिकायत की जाएगी। प्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 में लागू होने के बाद राजपत्र में प्रकाशित नियमों के अनुसार मतांतरित कराने वालों के खिलाफ छह माह से तीन वर्ष तक की सजा होगी।

शांति समिति की बैठक में उपस्थित हिंदू संगठन के पदाधिकारी व ईसाई समाज के पदाधिकारियों की उपस्थिति में स्पष्ट तौर पर निर्णय लिया गया है कि अब धमतरी शहर व जिले के किसी भी गांव में कोई भी ईसाई प्रार्थना करने नहीं जाएगा। यदि जाता है तो इसे मतांतरण माना जाएगा और शिकायत पर कानूनी कार्रवाई होगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि कोई हिंदू मतांतरित होता है, तो उसे विधिवत बपतिस्मा कर शासन-प्रशासन को जानकारी देना है। वहीं ऐसे लोगों की सूची ईसाई समाज को शासन को देना होगा, इसके बाद ही ऐसे मतांतरित लोग प्रार्थना सभा में शामिल हो सकते हैं और उन्हें ईसाई माना जाएगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि ईसाई समाज के लोग हिंदुओं के घर इलाज व सहायता के नाम पर नहीं जाएंगे। यदि ऐसा करते पाया गया तो इसे सीधे तौर पर मतांतरण माना जाएगा। इसके अलावा बैठक में कई अन्य निर्णय लिए गए और चर्चा भी हुई।

बैठक में हिंदू संगठन के दीपक सिंह ठाकुर, पुरुषोत्तम निषाद, चित्रेश साहू, डागेश्वर साहू, मोहन साहू समेत ईसाई समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी, एएसपी डीसी पटेल, एसडीएम पीयूष तिवारी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शांति समिति की बैठक में उपस्थित हिंदू जागरण मंच के प्रांत युवा प्रमुख दीपक सिंह ठाकुर ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जो भी ईसाई समाज में मिलना चाहते हैं, ऐसे लोग बकायदा शपथ पत्र के साथ शासन को जानकारी दें। कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरी तरह से बपतिस्मा कराएं, ताकि वह ईसाई हो जाए। इसकी जानकारी सार्वजनिक व शासन तक पहुंचने के बाद ऐसे मतांतरित लोगों को हिंदू होने के नाम पर शासन से जो लाभ मिलता है, इसे रद किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि शहर में बाइबिल के कोर्स संचालित होते हैं, इसके लिए शहर में दो जगह चिन्हांकित हैं। यहां कोर्स करने पहुंचने वाले हिंदू बच्चों की जानकारी शासन-प्रशासन को दी जाए, ताकि ये बच्चे गांवों में जाकर दूसरों को बाइबिल की जानकारी न दे सकें। हिंदू बच्चों को यहां यह कोर्स न कराया जाए।

बैठक में उपस्थित ईसाई समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि हम चंगाई सभा का आयोजन कहीं भी नहीं करते हैं। समाज के लोग मिल-जुलकर एक स्थान पर प्रार्थना करते हैं। हम किसी को मतांतरण नहीं कराते हैं। यदि कोई स्वेच्छा से ईसाई समाज में आना चाहते हैं, तो वे पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरा कर आए।

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