डौकाबूड़ा डेम के गेट बंद, बारिश में ग्रामीण परेशान — जलभराव से खेत और घरों पर मंडराया खतरा, ग्रामीणों ने की गेट खोलने और नियमित निगरानी की मांग

गोविंद अग्रवाल / पोड़ी उपरोड़ा। बारिश के मौसम में पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के सिरमिना क्षेत्र में बना डौकाबूड़ा डेम अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि डेम के गेट लंबे समय से बंद पड़े हैं, जिसके चलते डेम के ऊपरी हिस्से में लगातार पानी जमा हो रहा है। जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भरने के साथ ही कई स्थानों पर घरों में भी पानी घुसने की स्थिति बन रही है।
बारिश बढ़ी तो बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण डेम में पानी का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में समय रहते पानी की निकासी नहीं की गई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। डेम का पानी अब ग्रामीणों के आवागमन वाले रास्तों के लिए भी परेशानी पैदा कर रहा है।
सिंचाई विभाग पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि डौकाबूड़ा डेम का निर्माण सिंचाई विभाग द्वारा कराया गया है, लेकिन नियमित रखरखाव और निगरानी के अभाव में डेम की व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है। आरोप है कि बारिश के दौरान जलस्तर बढ़ने के बावजूद विभाग के अधिकारी और इंजीनियर नियमित रूप से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं लेते।
समय पर गेट खोले जाएं, ग्रामीणों को मिले राहत
ग्रामीणों की मांग है कि जब डेम में पानी का स्तर बढ़े तो परिस्थितियों के अनुसार गेट खोलकर पानी की निकासी की जाए, ताकि डेम के ऊपरी हिस्से में रहने वाले ग्रामीणों और किसानों को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते निगरानी और पानी की निकासी नहीं हुई तो बारिश के दौरान बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने रखी ये प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से डौकाबूड़ा डेम की नियमित निगरानी कराने, खराब गेटों की मरम्मत कराने और आवश्यकता के अनुसार पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों को बारिश के दौरान नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करने की मांग भी उठाई गई है।
अब सवाल यह है कि डौकाबूड़ा डेम में बढ़ते जलस्तर और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए सिंचाई विभाग कब सक्रिय होता है? बारिश लगातार जारी रहने के बीच ग्रामीणों की निगाहें अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



