छत्तीसगढ़ से निकलकर यूरोप के मैदानों तक, स्टार फुटबालर किरण पिस्दा के हौसले के आगे दुनिया ने टेके घुटने

छत्तीसगढ़ की उभरती स्टार फुटबालर किरण पिस्दा आज भारतीय महिला फुटबाल में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली 24 वर्षीय किरण का स …और पढ़ें

HighLights
- क्रोएशियाई क्लब के लिए खेलने वाली छत्तीसगढ़ की पहली महिला फुटबालर।
- मैदान पर किसी भी पोजीशन के साथ गोलकीपर की भूमिका निभाने में माहिर।
- टीम से बाहर होने के बाद मेहनत और अटूट विश्वास से बनाई वैश्विक पहचान।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राज्य की उभरती स्टार फुटबालर किरण पिस्दा आज भारतीय महिला फुटबाल में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली 24 वर्षीय किरण का सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। वह न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, बल्कि यूरोप की क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो जाग्रेब जैसे क्लब के लिए भी खेल चुकी हैं।
बहुमुखी प्रतिभा का परिचय
हाल ही में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान उन्होंने गोलकीपर की भूमिका निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। किसी भी पोजिशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
शुरुआत से मिला परिवार और स्कूल का साथ
किरण को शुरुआती दौर में परिवार और स्कूल से पूरा सहयोग मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके प्रेरणास्रोत रहे। स्कूल के दिनों से ही उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अवसर मिलने लगे, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया।
राष्ट्रीय टीम से बाहर होना बना टर्निंग प्वाइंट
शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई के लिए रायपुर आने के बाद छत्तीसगढ़ महिला लीग में उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर में बुलावा मिला। हालांकि, फिटनेस और अनुभव की कमी के चलते वह भारतीय टीम में जगह नहीं बना सकीं। इस असफलता को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि सुधार का अवसर माना और फिटनेस, खेल विश्लेषण व मानसिक मजबूती पर लगातार काम किया।
मेंटोर का मिला मार्गदर्शन
किरण के करियर में कोच योगेश कुमार जांगड़ा का अहम योगदान रहा। कठिन समय में उनके मार्गदर्शन ने किरण को सकारात्मक सोच बनाए रखने और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव, फिर भी सीख जारी
किरण 2022 सैफ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रह चुकी हैं और यूरोप में खेलने का अनुभव भी हासिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद हाल ही में एएफसी महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में चयन न होना उनके लिए एक और चुनौती बना। वह इसे निराशा नहीं, बल्कि मजबूत वापसी की प्रेरणा मानती हैं।



