छत्तीसगढ़ में शोर मचाने वालों की अब खैर नहीं… कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार ने कोर्ट में सौंपा ड्राफ्ट

छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण की बेलगाम स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए …और पढ़ें

HighLights
- चीफ़ जस्टिस की बेंच का सरकार को निर्देश
- ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए
- अगली सुनवाई में हलफनामे के साथ दें जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण की बेलगाम स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को आगामी तीन अगस्त 2026 तक ताजा प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
कानून में बड़े बदलाव की तैयारी
कोर्ट की कड़ाई के बाद शासन ने बताया है कि ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पुराने ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985’ में बड़े और कड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसका ड्राफ्ट अब अंतिम चरण में है। पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में गृह विभाग के प्रमुख सचिव ने कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत हलफनामा पेश किया। इस हलफनामे में सरकार ने माना कि ध्वनि प्रदूषण से निपटने के लिए मौजूदा कानून को और मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
अंतिम चरण में ड्राफ्ट कमेटी की समीक्षा
हलफनामे में सरकार ने जानकारी दी कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन के लिए गठित ड्राफ्ट कमेटी ने हाल ही में 11 मई, दो जून, आठ जून और 15 जून 2026 को लगातार बैठकें की हैं। कमेटी ने विभिन्न हितधारकों और जमीनी अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर प्रस्तावित कानून की धारा-दर-धारा बारीकी से समीक्षा कर जरूरी सुधार किए हैं। नए संशोधन का ड्राफ्ट अब पूरी तरह तैयार होने की कगार पर पहुंच चुका है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में आएगा बिल
गृह विभाग के हलफनामे के मुताबिक ड्राफ्ट कमेटी द्वारा अंतिम रूप दिए जाने के बाद इस पूरे प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य की मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इस संशोधन विधेयक को छत्तीसगढ़ विधानसभा के पटल पर विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद यह पूरे राज्य में कानून के रूप में लागू होगा।
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ठंडे बस्ते में नहीं जाएगा मामला: हाई कोर्ट
चीफ जस्टिस की बेंच ने सरकार द्वारा प्रस्तुत इस प्रगति रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता। हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस दिशा में तेजी से काम करें और अगली सुनवाई की तारीख से पहले एक नया हलफनामा दायर कर बताएं कि ड्राफ्ट को फाइनल करने और कानून बनाने की दिशा में और क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।




