छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध नए कानून का रास्ता साफ, राज्यपाल ने लौटाया पुराना विधेयक


छत्तीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बनाने की दिशा में तकनीकी बाधा दूर हो गई है। …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 17 Mar 2026 08:49:25 AM (IST)Updated Date: Tue, 17 Mar 2026 08:51:05 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध नए कानून का रास्ता साफ, राज्यपाल ने लौटाया पुराना विधेयक

HighLights

  1. पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया
  2. इसी बजट सत्र में आएगा नया बिल
  3. एक वर्ष में प्रदेशभर में कुल 96 मामले दर्ज

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बनाने की दिशा में तकनीकी बाधा दूर हो गई है। वर्ष 2006 में डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान पारित ”धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक” को राष्ट्रपति द्वारा वापस भेजे जाने के बाद अब राज्यपाल ने इसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है।

इस संवैधानिक प्रक्रिया के साथ ही प्रदेश में नया और प्रभावी कानून लाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विधेयक लौटाने की जानकारी आसंदी ने सोमवार को सदन में दी।

इसी बजट सत्र में आएगा नया बिल

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार इसी बजट सत्र में नया ”छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पेश करने की तैयारी में है। इस नए मसौदे को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। पुराने विधेयक के लंबित होने के कारण कानूनी तकनीकी फंसी थी, जो अब राज्यपाल की वापसी के बाद सुलझ गई है।

एक वर्ष में प्रदेशभर में कुल 96 मामले दर्ज

राज्य में मतांतरण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में कुल 96 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 32 मामले अकेले बिलासपुर जिले के हैं। सरकार का मानना है कि नया कानून लागू होने से जबरन मतांतरण की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी

यह बिल (छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय विधेयक, 2026) इसी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। यदि यह कानून लागू होता है, तो स्वैच्छिक मतांतरण करने वाले व्यक्तियों को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में मतांतरण पर सरकार का कड़ा रुख, बजट सत्र में आएगा नया विधेयक; 10 साल की सजा का प्रावधान

10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रविधान

प्रलोभन, छल-कपट या धोखाधड़ी से कराए गए मतांतरण पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रविधान है। सामूहिक मतांतरण के मामले में सजा और भी कठोर होगी। मतांतरण के 60 दिनों के भीतर एक घोषणा पत्र भरना अनिवार्य होगा और प्रशासन इसकी जांच करेगा कि यह स्वेच्छा से हुआ है या नहीं। न्यायालय पीड़ित को पांच लाख रुपये तक का मुआवजा दिलाने का आदेश दे सकता है।



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