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छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक फैसला… जशपुर में मतांतरितों से वापस ली जाएगी आदिवासियों की 114 एकड़ जमीन


छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कलेक्टर कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। इसके तहत आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए बनी धार …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 08 Apr 2026 07:42:20 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Apr 2026 07:42:20 PM (IST)

छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक फैसला... जशपुर में मतांतरितों से वापस ली जाएगी आदिवासियों की 114 एकड़ जमीन
मतांतरितों से वापस ली जाएगी आदिवासियों की 114 एकड़ जमीन।

HighLights

  1. मतांतरितों से वापस ली जाएगी आदिवासियों की 114 एकड़ जमीन।
  2. राज्य में मुस्लिमों द्वारा भी आदिवासियों की जमीन खरीदने के मामला।
  3. जमीन खरीदने वाले मतांतरित भी गैर आदिवासी की श्रेणी में माने जाएंगे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कलेक्टर कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। इसके तहत आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए बनी धारा 170-ख के प्राविधान अब मतांतरितों पर भी समान रूप से लागू होंगे।

कलेक्टर रोहित व्यास ने पहाड़ी कोरवा आदिवासियों की अपील पर सुनवाई करते हुए मतांतरितों द्वारा खरीदी गई करीब 114 एकड़ जमीन के वर्ष 1955 से 1966 के मध्य हुए सौदों को नियमों के उल्लंघन के आधार पर निरस्त कर मूल स्वामियों को भूमि वापस लौटाने का आदेश दिया है। राज्य में मुस्लिमों द्वारा भी आदिवासियों की जमीन खरीदने के मामले कलेक्टर कोर्ट में चल रहे हैं।

क्या है धारा 170-ख?

आदिवासियों की जमीन को गलत तरीके से हड़पने से बचाने के लिए बनाया गया एक अत्यंत शक्तिशाली कानूनी कवच है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई गैर-आदिवासी, किसी आदिवासी की जमीन धोखाधड़ी या दबाव में न ले सके।

यदि किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति ने किसी आदिवासी की जमीन खरीदी है, तो उसे यह साबित करना होगा कि वह जमीन उसने वैध तरीके से और कलेक्टर की पूर्व अनुमति लेकर खरीदी है। कलेक्टर के इस फैसले के तहत आदिवासियों की जमीन खरीदने वाले मतांतरित भी गैर आदिवासी की श्रेणी में माने जाएंगे।



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