छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर से 1.92 करोड़ का ऋण घोटाला, अधिकारी-कर्मचारियों पर FIR के निर्देश


जांच में 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर कुल एक करोड़ बयानवे लाख बयासी हजार छह रुपये का अवैध आहरण किया जाना पाया गया है। फर्जी ऋण स्वीकृति और …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 02 Mar 2026 08:04:01 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Mar 2026 08:04:01 PM (IST)

छत्तीसगढ़ में 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर से 1.92 करोड़ का ऋण घोटाला, अधिकारी-कर्मचारियों पर FIR के निर्देश
छत्तीसगढ़ में 127 किसानों के फर्जी हस्ताक्षर से 1.92 करोड़ का ऋण घोटाला, AI generated image

HighLights

  1. 127 किसानों के फर्जी लोन मामले में 8 दोषियों पर होगी FIR
  2. केरजू समिति में 1.92 करोड़ रुपये के अवैध आहरण की पुष्टि
  3. फर्जी लोन दिखाकर काटी जा रही थी किसानों के धान की राशि

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। सरगुजा जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केरजू में फर्जी ऋण वितरण एवं आहरण की पुष्टि हुई है। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर एसडीएम सीतापुर की अध्यक्षता में गठित संयुक्त दल ने शिकायत की जांच की। जांच में 127 किसानों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर कुल एक करोड़ बयानवे लाख बयासी हजार छह रुपये का अवैध आहरण किया जाना पाया गया है। फर्जी ऋण स्वीकृति और राशि आहरण की 1900 पन्नों की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है।

अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ अवैध आहरण

इसी जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी मदन सिंह, जोगी राम, सैनाथ केरकेट्टा वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं प्राधिकृत अधिकारी, भूपेन्द्र सिंह परिहार तात्कालिक शाखा प्रबंधक, शिवशंकर सोनी सहायक लेखापाल, ललिता सिन्हा कैशियर, सुमित कुमार सामान्य सहायक एवं दीपक कुमार चक्रधारी कम्प्यूटर ऑपरेटर को उक्त अनियमितता एवं वित्तीय गड़बड़ी के लिए दोषी पाया गया है। प्रकरण में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज कराने कलेक्टर अजीत वसंत ने आदेशित किया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश से सहकारी समिति के अधिकारी-कर्मचारियों में खलबली मच गई है। इसी समिति में पदस्थ एक कर्मचारी ने पूर्व में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। गड़बड़ी में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश तो दिया गया है लेकिन किसानों को राहत कैसे मिलेगी यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

नोटिस मिलने के बाद उजागर हुई गड़बड़ी

सहकारी समिति केरजू में पंजीकृत किसानों को ऋण जमा करने का नोटिस जारी किया गया था। इनमें दर्जनों किसान ऐसे थे जिन्होंने समिति से ऋण ही नहीं लिया था। बगैर ऋण लिए कर्जदार बना देने से परेशान किसानों ने स्थानीय स्तर पर शिकायत की थी। जांच की पहल नहीं होने पर उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात कर शिकायत की थी। शिकायत के बाद जांच में गड़बड़ी उजागर हुई। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के नेतृत्व में केरजू सहकारी समिति की कार्यशैली से परेशान किसानों ने कलेक्ट्रेट में कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही घोषणा की थी कि वे इस शिकायत की जांच कराएंगे। कलेक्टर की पहल से किसानों को राहत मिली है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि किसानों की ऋण राशि का समायोजन कैसे होगा।

धान बिक्री की राशि की जा रही थी फर्जी ऋण में समायोजित

किसानों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने न तो उतनी राशि का ऋण लिया और न ही किसी प्रकार की निकासी की अनुमति दी, फिर भी उनके खातों में भारी-भरकम ऋण दर्शाया गया है। किसानों ने बताया था कि धान विक्रय के बाद जब किसान भुगतान के लिए सहकारी बैंक पहुंच रहे थे तो पता चला था कि उनकी पूरी या आंशिक राशि ऋण समायोजन में काट ली गई है। कई प्रकरणों में मृतकों और यहां तक कि भूमिहीन व्यक्तियों के नाम पर भी ऋण चढ़ाया गया था, जबकि संबंधित लोगों ने कभी ऋण लिया ही नहीं था। किसानों का कहना है कि ऋण की सूची मांगने पर समिति कर्मचारी टालमटोल कर रहे थे और जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही थी। कई छोटे किसान ऐसे हैं जिनकी पूरी धान बिक्री के बाद भी कथित ऋण की भरपाई नहीं हो पा रही थी जिससे वे गंभीर मानसिक दबाव में थे।



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