छत्तीसगढ़ के शिक्षक ने कविता से बनाई केमेस्ट्री आसान, “लीना की रब से फरियाद, बेटा मांगे कार स्कूटर बाप राजी” से रटाया पीरियोडिक टेबल

रवि भूतड़ा, नईदुनिया, बालोद। रसायन विज्ञान का नाम सुनते ही कई विद्यार्थियों के सामने कठिन सूत्र, जटिल नाम और लंबी आवर्त सारणी (Periodic Table) घूमने लगती है। लेकिन बालोद के व्याख्याता नेमसिंह साहू ने इसी मुश्किल विषय को कविता, दोहे, प्रयोग और रोचक ट्रिक्स के जरिए आसान बनाने की पहल की है। आधुनिक आवर्त सारणी (Periodic Table) में शामिल 118 तत्वों के नाम और प्रतीक याद करना विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। साहू का मानना है कि हर तत्व को अलग अलग रटने के बजाय उसे किसी परिचित शब्द, वाक्य या घटना से जोड़ना अधिक प्रभावी होता है।
ग्रुप एक के H, Li, Na, K, Rb, Cs और Fr को याद कराने के लिए वे लीना की रब से फरियाद जैसी ट्रिक इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह ग्रुप दो के Be, Mg, Ca, Sr, Ba और Ra के लिए बेटा मांगे कार स्कूटर बाप राजी वाक्य विद्यार्थियों को आसानी से याद हो जाता है।
प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई पर जाेर
साहू केवल कक्षा में व्याख्यान देने तक सीमित नहीं रहते। उनका जोर प्रयोगशाला आधारित पढ़ाई पर भी है। उनका कहना है कि रसायन विज्ञान तथ्यों के साथ प्रयोगों का विषय है, इसलिए विद्यार्थियों को अवधारणाएं स्वयं देखकर और करके समझने का अवसर मिलना चाहिए। एस ब्लॉक, पी ब्लॉक, डी ब्लॉक और एफ ब्लॉक के तत्वों को याद कराने के लिए वे कविता और दोहों का सहारा लेते हैं। इससे कठिन पाठ बोझ के बजाय रोचक गतिविधि में बदल जाता है।
माओवाद प्रभावित इलाके से शुरू किया सफर
उनकी शिक्षकीय यात्रा भी प्रेरक रही है। वर्ष 2008 में सुकमा जिले के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र से शुरू हुई सेवा यात्रा में उन्होंने 11 वर्षों तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा। बालोद आने के बाद भी उन्होंने नवाचारपूर्ण शिक्षण के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर काम जारी रखा।
40 विद्यार्थियों को राज्यपाल से पुरस्कार
स्काउट गाइड और रोवर रेंजर गतिविधियों को उन्होंने बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम बनाया। उनके मार्गदर्शन में 40 से अधिक विद्यार्थी राज्यपाल पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। इन गतिविधियों से मिलने वाले बोनस अंकों का लाभ विद्यार्थियों को 10वीं और 12वीं की अंकसूची में भी मिलता है।
टीमवर्क की भावना बढ़ाते हैं
विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति रैली और तिरंगा यात्रा में भाग लेते हैं। हाइक और ट्रैकिंग के जरिए उनमें टीमवर्क और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित किया जाता है। गर्मियों में दो महीने तक प्याऊ घर चलाकर राहगीरों को पानी उपलब्ध कराया जाता है, जबकि नवरात्रि में मंदिरों में सेवा गतिविधियां भी कराई जाती हैं।
राज्यपाल करेंगे सम्मानित
इन्हीं नवाचारों और समर्पण के लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय बालोद के रसायन विज्ञान व्याख्याता नेमसिंह साहू को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उनके लिए यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की सफलता की पहचान भी है, जिन्हें उन्होंने रटने के बजाय समझने, प्रयोग करने और आगे बढ़ने की राह दिखाई है।




