छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के शासकीय स्वास्थ्य इतिहास में जुड़ा नया अध्याय


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने कोनी स्थित सिम्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को अत्याधुनिक रक्त केंद्र (ब्लड सेंटर) के संचालन के लिए आधिकारिक लाइसेंस गुरुवार 23 जुलाई को दे दिया है। यह उपलब्धि न केवल बिलासपुर संभाग बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।

अस्पताल में स्थापित अत्याधुनिक रक्त केंद्र नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) सीपत ने अपने कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मद के अंतर्गत निर्माण करवाया है। अत्याधुनिक उपकरणों एवं राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित यह रक्त केंद्र छत्तीसगढ़ के शासकीय अस्पतालों में सबसे उन्नत और आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस रक्त केंद्र की स्थापना एवं विकास में अस्पताल के अस्पताल अधीक्षक डा़ भानु प्रताप सिंह के निर्देशन और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

पैथोलााजी एवं रक्त कोष (ब्लड बैंक) के क्षेत्र में उनके 25 वर्षों के व्यापक अनुभव ने इस रक्त केंद्र की परिकल्पना, योजना, उपकरणों के चयन, कार्यप्रणाली के विकास तथा राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापना में अमूल्य योगदान दिया है। उनके कुशल नेतृत्व एवं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप यह रक्त केंद्र प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नई उपलब्धि बनकर सामने आया है।

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ब्लड सेंटर में मिलेगी ये सुविधाएं

  • होल ह्यूमन ब्लड (आईपी): सम्पूर्ण मानव रक्त, जो आपातकालीन स्थिति और सर्जरी में जीवन रक्षक साबित होता है।
  • पैक्ड रेड ब्लड कार्पसल्स / आरबीसी: सांद्रित लाल रक्त कोशिकाएं, जो एनीमिया और गंभीर रक्त अल्पता के उपचार में उपयोगी हैं।
  • फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी): रक्त के थक्के जमने की विकारों और ब्लीडिंग डिसआर्डर के इलाज होगा।
  • प्लेटलेटकंसंट्रेट / रैंडम डोनर प्लेटलेट(आरडीपी): डेंगू और अन्य रक्त विकारों में प्लेटलेट की कमी को दूर कर सकेंगे।
  • प्लेटलेट एफेरेसिस (सिंगल डोनर प्लेटलेट – एसडीपी): छत्तीसगढ़ के शासकीय अस्पतालों में पहली बार सीधे एक ही डोनर से उच्च गुणवत्ता वाली प्लेटलेट प्राप्त करने की अत्याधुनिक सुविधा।

मिलेंगे ये प्रमुख फायदे

  • निजी संस्थानों पर निर्भरता खत्म: अब तक प्लेटलेट या विशेष ब्लड कंपोनेंट्स के लिए मरीजों को महंगे निजी ब्लड बैंकों पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे अब पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।
  • गंभीर बीमारियों के इलाज में वरदान: यह केंद्र डेंगू, कैंसर, बोन मैरो प्रत्यारोपण, थैलेसीमिया, गंभीर रक्त विकारों और अन्य जटिल बीमारियों के उपचार में अत्यंत उपयोगी होगा।
  • उच्च गुणवत्ता वाली प्लेटलेट की समय पर उपलब्धता: मरीजों को समय पर उच्च गुणवत्ता की प्लेटलेट्स और रक्त अवयव उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे मरीजों कह जानें बचाई जा सकेंगी।
  • विश्वस्तरीय ट्रांसफ्यूजन सेवाएं: शासकीय क्षेत्र में पहली बार मरीजों को उच्च स्तरीय और सुरक्षित रक्त अवयव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मिल सकेंगे।

कड़े मानकों और कुशल तकनीकी अमला देगी सेवा

ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट, 1940 के नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त इस केंद्र में पेशेवर या भुगतान करने वाले डोनर्स से रक्त संग्रह पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। केंद्र के संचालन के लिए डा़. रश्मी नायक (एमडी पैथोलाजी), डा़ रश्मी साहू, डा़ मयंक कुमार तिवारी, डा़ शहनवाज बानो, डा़ रोली शर्मा, डा़ अनुराग यादव जैसे अनुभवी चिकित्सा अधिकारियों के साथ-साथ तकनीकी सुपरवाइजर सुनीता आभूषण और कुशल तकनीशियनों व नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की गई है, जो चौबीस घंटे अपनी सेवाएं देंगे।

वर्जन

यह छत्तीसगढ़ की शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस अत्याधुनिक रक्त केंद्र का उद्देश्य केवल सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त एवं रक्त अवयव उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय ट्रांसफ्यूजन सेवाएं प्रदान करना भी है। विशेषकर सिंगल डोनर प्लेटलेट की सुविधा प्रारंभ होना छत्तीसगढ़ की शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं में एक मील का पत्थर है। इसमे जिला प्रशासन, औषधि एवं खाद्य नियंत्रक विभाग, सीडीएससीओ और एनटीपीसी सीपत ने विशेष सहयोग दिया है। इससे क्षेत्र की चिकित्सा सुविधा और भी बेहतर होगी।

डा़ बीपी सिंह, अस्पताल अधीक्षक



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