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छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण्य में मिली 3 फीट लंबी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, देखें तस्वीरें


छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 27 May 2026 08:37:14 PM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 08:37:14 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण्य में मिली 3 फीट लंबी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, देखें तस्वीरें
3 फीट लंबी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी।

HighLights

  1. 3 फीट लंबी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी मिली
  2. वन मंत्री ने दी बधाई और प्रयासों को भी सराहा
  3. विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत जानें

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बलौदाबाजार वनमंडल के अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (जायंट मालाबार स्क्विरल) दिखाई दी। इस दुर्लभ वन्यजीव के दिखने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वैज्ञानिकों में उत्साह है।

वन मंत्री ने दी बधाई, प्रयासों को सराहा

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ सरकार की वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की योजनाओं का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहे हैं।

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देवपुर समर कैंप में दिखी दुर्लभ प्रजातिबलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन 16 मई को आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी एवं साइबर रिस्क एक्सपर्ट श्री हेमंत वर्मा ने की।

विशाल भारतीय गिलहरी की खासियत

विशाल भारतीय गिलहरी, जिसका वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। इसकी पूंछ सहित लंबाई लगभग तीन फीट तक होती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का सुंदर मिश्रण होता है। यह अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर ही बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त दुर्लभ प्रजाति

यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है। यह स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास का वन क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और सुरक्षित है।

बच्चों में बढ़ी प्रकृति संरक्षण की जागरूकता

वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया जिसमें शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। वन विभाग का मानना है कि ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन से नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ती है। यह आयोजन राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता आधारित योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



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