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किसानों के लिए खुशखबरी: छत्तीसगढ़ में 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने को कैबिनेट की हरी झंडी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों, सरकारी कर्मचारियों और आम लोगों से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं। इस बैठक में कुल 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनका सीधा लाभ राज्य के विभिन्न वर्गों को मिलेगा।

कैबिनेट के प्रमुख निर्णयों में से एक यह है कि बिजली बिल में 400 यूनिट तक मिल रही राहत को 31 मार्च 2027 तक जारी रखा जाएगा। यह फैसला आम उपभोक्ताओं को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत प्रदान करेगा और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का हिस्सा है।

किसानों के हित में भी कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की प्रक्रिया 15 नवंबर से शुरू होगी। इस वर्ष किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

धान खरीदी की प्रक्रिया को सुगम बनाने और अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 360 नए धान खरीदी केंद्र खोले जाएंगे। इन नए केंद्रों के माध्यम से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी और उन्हें लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सुविधा की घोषणा की गई है। अब सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों को अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में वित्तीय बोझ से राहत मिलेगी।

इससे पहले, 11 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे। उस बैठक में पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई थी। इन पदों पर रिक्तियों के अनुसार भर्ती की जाएगी, जिससे पूर्व अग्निवीरों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

राज्य सरकार ने पहले ही पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक भर्ती में 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान किया हुआ है। यह प्रावधान पूर्व अग्निवीरों को सरकारी सेवा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेगा और उनके अनुभव का लाभ राज्य को मिलेगा।

11 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली थी। इस बदलाव के लिए छत्तीसगढ़ शासन के कार्य आवंटन नियम में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, जिससे विभाग के कार्यक्षेत्र और पहचान में स्पष्टता आएगी।

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