छत्तीसगढ़

बिना तलाक दूसरी पत्नी के साथ रह रहे पिता को बच्चे की कस्टडी नहीं, छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला


यह मामला बच्चे की कस्टडी से जुड़ा था। सात साल का बच्चा अपनी मां के साथ रह रहा है। फैमिली कोर्ट ने पहले ही पिता को कस्टडी देने से इन्कार कर दिया था। पि …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 22 Jan 2026 09:07:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Jan 2026 09:20:30 PM (IST)

बिना तलाक दूसरी पत्नी के साथ रह रहे पिता को बच्चे की कस्टडी नहीं, छत्‍तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला
छत्‍तीसगढ़ हाई कोर्ट।

HighLights

  1. कोर्ट ने कहा कि बच्चे का हित सर्वोपरि रहेगा।
  2. आर्थिक क्षमता के आधार पर कस्‍टडी नहीं।
  3. फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा गया।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि जो पिता बिना तलाक लिए दूसरी महिला (दूसरी पत्नी) के साथ रह रहा है, उसे अपने बच्चे की कस्टडी देने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चे का हित सबसे ऊपर है और केवल पिता की आर्थिक क्षमता के आधार पर कस्टडी नहीं दी जा सकती।

यह मामला बच्चे की कस्टडी से जुड़ा था। सात साल का बच्चा अपनी मां के साथ रह रहा है। फैमिली कोर्ट ने पहले ही पिता को कस्टडी देने से इन्कार कर दिया था। पिता ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि बच्चा जन्म से ही अपनी मां के साथ रह रहा है और उसे वहां पूरा प्यार, देखभाल और सुरक्षित माहौल मिल रहा है। ऐसे में उसकी कस्टडी बदलना बच्चे के हित में नहीं होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह तय नहीं है कि सौतेली मां के साथ बच्चे को वही प्यार और अपनापन मिलेगा या नहीं। पिता ने दलील दी थी कि वह आर्थिक रूप से सक्षम है और बच्चे की जरूरतें बेहतर तरीके से पूरी कर सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल पैसों के आधार पर बच्चे की कस्टडी तय नहीं की जा सकती।

बच्चे का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास सबसे ज्यादा जरूरी है। कोर्ट ने हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 का हवाला देते हुए कहा कि भले ही पिता को प्राकृतिक अभिभावक माना गया हो, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। हर मामले में बच्चे का कल्याण सर्वोच्च होता है।

naidunia_image

‘सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता’, Chhattisgarh High Court ने आरोपी को किया बरी

क्या है पूरा मामला

  • पति-पत्नी की शादी वर्ष 2013 में हुई थी और उनके दो बेटे हैं।
  • विवाद के बाद वर्ष 2021 में पत्नी छोटे बेटे के साथ मायके चली गई।
  • बाद में बड़ा बेटा भी मां के पास रहने लगा।
  • पिता ने बड़े बेटे की कस्टडी के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन किया था, जिसे खारिज कर दिया गया।
  • इसके बाद पिता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई।
  • इस तरह हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि बच्चे की कस्टडी तय करते समय सबसे अहम बात बच्चे का समग्र कल्याण है, न कि केवल माता-पिता की आर्थिक स्थिति।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!