छत्तीसगढ़

बिलासपुर में बर्ड फ्लू का ‘खतरनाक खेल’, कंटेनमेंट जोन में खुले में फेंके संक्रमित मास्क-ग्लव्स; शहर में बोरियों में मिलीं मरी मुर्गियां


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बर्ड फ्लू के खतरे के बीच बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिला प्रशासन द्वारा कंटेनमेंट जोन घोषित किए गए इलाके में ही संक्रमित ग्लव्स और मास्क खुले में फेंके जा रहे हैं, जबकि शहर के कई इलाकों में मरी हुई मुर्गियां भी पाई गई हैं।

कंटेनमेंट जोन में ही नियमों की अनदेखी

शासकीय कुक्कुट पालन परिक्षेत्र कोनी से एक किलोमीटर तक का क्षेत्र कंटेनमेंट जोन घोषित है। यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक है और सख्त निगरानी की जा रही है।

इसके बावजूद परिक्षेत्र के मुख्य गेट के पास कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किए गए ग्लव्स, मास्क और पीपीई किट खुले में पड़े मिले। नियमों के अनुसार इन्हें बायो-मेडिकल वेस्ट मानकर जलाना या दफनाना अनिवार्य है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।

संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि खुले में फेंका गया यह कचरा हवा या जानवरों के जरिए संक्रमण को कंटेनमेंट जोन से बाहर फैला सकता है। जब सरकारी संस्थान ही प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे, तो निजी पोल्ट्री फार्मों पर नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।

15 एकड़ क्षेत्र में सैनिटाइजेशन जारी

वायरस को खत्म करने के लिए 15 एकड़ क्षेत्र में सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है। रायगढ़ से विशेष फायर सैनिटाइजर मशीन मंगाकर लगातार केमिकल का छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन मुख्य गेट के पास फैला मेडिकल वेस्ट इन प्रयासों पर पानी फेरता नजर आ रहा है।

शहर में भी फेंकी जा रहीं मरी मुर्गियां

पेंडारी और खमतराई क्षेत्र में मरी हुई मुर्गियां खुले में फेंके जाने की शिकायतें मिली हैं। खमतराई के ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास बोरियों में भरी मरी मुर्गियां मिलने से संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।

खजूरी नवागांव निवासी श्रद्धा यादव ने शिकायत की कि काठाकोनी क्षेत्र में सड़क किनारे मुर्गियां फेंकी जा रही हैं, जिस पर कंट्रोल रूम ने पशु चिकित्सकों को सूचना दी है।

अधिकारियों का क्या कहना

“संक्रमित ग्लव्स और मास्क को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करना जरूरी है। खुले में फेंकने से वायरस फैल सकता है और यह बड़ी लापरवाही है।”

— डॉ. महेश यादव, सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी

“पूरे क्षेत्र में सैनिटाइजेशन जारी है और कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। यदि ऐसी लापरवाही सामने आई है, तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा।”

— डॉ. जीएसएस तंवर, संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा विभाग

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