छत्तीसगढ़

बिलासपुर में बाबूओं की मनमानी पर वकील नाराज, एडीएम ऑफिस में नकल निकलवाने के लिए चक्कर काटने को मजबूर, SDM से कर दी शिकायत


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में तहसील कार्यालय और न्यायालयों में नकल शाखा की लचर व्यवस्था और बाबूओं की मनमानी के खिलाफ अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है।

Publish Date: Sat, 18 Jul 2026 12:22:31 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Jul 2026 12:24:19 PM (IST)

बिलासपुर में बाबूओं की मनमानी पर वकील नाराज, एडीएम ऑफिस में नकल निकलवाने के लिए चक्कर काटने को मजबूर, SDM से कर दी शिकायत
बिलासपुर में बाबूओं की मनमानी पर वकील नाराज (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. नकल निकलवाने वकील काट रहे चक्कर, बाबू बोले फाइल गायब
  2. बिलासपुर तहसील न्यायालय में नकल के नाम पर भारी टालमटोल
  3. एसडीएम से शिकायत, आवक-जावक रजिस्टर में एंट्री दर्ज करने की मांग

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। तहसील कार्यालय और न्यायालयों में नकल शाखा की लचर व्यवस्था और बाबूओं की मनमानी के खिलाफ अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है। जिला न्यायालय अधिवक्ता नवीन यादव ने अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपकर व्यवस्था को सुचारू बनाने और विलंब करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।अधिवक्ता नवीन यादव ने बताया कि तहसील न्यायालयों से आदेश या प्रकरणों की नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया को बाबूओं ने बेहद जटिल और प्रताड़ित करने वाला बना दिया गया है।

अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने बीते 22 जून को एक प्रकरण क्रमांक 202509072500016/अ-27 की नकल के लिए आवेदन किया था, जिसकी रसीद संख्या 6765/26 है। आवेदन के करीब एक महीने बीत जाने के बाद भी आज तक उन्हें नकल उपलब्ध नहीं कराई गई है।

पूछने पर न्यायालय के बाबू सिर्फ यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि मामला नकल शाखा भेज दिया गया है, जबकि नकल शाखा वाले फाइलों के गुम होने या अन्य बहानेबाजी कर चक्कर लगवा रहे हैं। शिकायत में इस बात का भी उल्लेख है कि तहसील न्यायालय से नकल शाखा के लिए भेजी जाने वाली फाइलों की एंट्री किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाती।

प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह रिकार्ड ही नहीं रहता कि कौन सी फाइल कब और कहां भेजी गई, जिसका खामियाजा वकीलों और दूर-दराज से आने वाले गरीब पक्षकारों को भुगतना पड़ता है। अधिवक्ता ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बकायदा आवक-जावक रजिस्टर में तिथि दर्ज करने की अनिवार्य व्यवस्था लागू की जाए।

बाबूओं की लेत-लतीफी से लोग परेशान

अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील कार्यालय के कुछ बाबू जानबूझकर छोटी-छोटी तकनीकी परेशानियां बताकर आवेदकों को दौड़ाते हैं। लेतलतीफी के कारण समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाते, जिससे न्यायालयीन पैरवी और अन्य जरूरी शासकीय कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

यह भी पढ़ें- बदली न्याय व्यवस्था को बीते दो साल, पर वकीलों को याद नहीं हो पा रहीं नई धाराएं

रजिस्टर में दर्ज हो आवक-जावक तिथि

शिकायतकर्ता ने सुझाव दिया है कि तहसील से रीडर या हेड कापिस्ट द्वारा जब भी कोई आवेदन नकल शाखा भेजा जाए तो उसकी तारीख और समय स्पष्ट रूप से रजिस्टर में दर्ज हो। इससे यह साफ रहेगा कि किस स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है और जवाबदेही तय की जा सकेगी।

पीडित ने बताया कि नेताम बाबू ने फाइल को रखा हुआ है, जानकारी पर तहसीलदार को निर्देश दिया गया है कि जिस भी रीडर के पास नकल रखी है उससे तत्काल कापी आवेदक पक्ष को दिलाई जाए और संबंधित रीडर पर कार्रवाई भी करें। मनीष साहू, एसडीएम बिलासपुर।



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