बिलासपुर में भर्ती अभ्यर्थियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगा सुरक्षित ट्रैक, स्टेडियम में अभ्यास की छूट देने की गुहार

बिलासपुर में सीने में खाकी पहनने का जुनून और पैरों में छालों की परवाह किए बिना सुबह के अंधेरे में सड़कों पर दौड़ते युवा केवल अभ्यास नहीं कर रहे, बल्कि अपनी तकदीर गढ़ने की जंग लड़ रहे हैं। शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बहतराई खेल परिसर और पुलिस ग्राउंड मौजूद होने के बाद भी इन भावी रक्षकों के लिए मैदान के दरवाजे बंद हैं।
अपनी उम्मीदों को टूटने से बचाने और एक अदद सुरक्षित ट्रैक की गुहार लेकर मंगलवार को दर्जनों युवक-युवतियां कलेक्ट्रेट की चौखट पर पहुंचे। अभ्यर्थियों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी कि उन्हें अभ्यास के लिए सुरक्षित ट्रैक उपलब्ध कराया जाए।
सड़कों पर डामर की सख्त सतह पर लगातार दौड़ने के कारण कई अभ्यर्थियों के पैरों और घुटनों में गंभीर चोटें आ रही हैं। तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटना का खतरा सिर पर मंडराता रहता है। युवाओं का कहना है कि स्टेडियम के ट्रैक पर अभ्यास मिलने से वे इंजरी से बच सकेंगे और लॉन्ग जंप व रनिंग का सही प्रशिक्षण ले पाएंगे।
करोड़ों की लागत से तैयार बहतराई खेल परिसर और पुलिस मैदान अधिकांश समय सूने पड़े रहते हैं, जबकि जरूरतमंद युवा बाहर धूल फांकने को विवश हैं। सख्त पहरे के कारण खेल परिसर खाली पड़े रहते हैं और अभ्यर्थियों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अभ्यर्थियों ने प्रशासन को आश्वस्त किया है कि वे परिसर के नियमों, गरिमा और स्वच्छता का पूरा सम्मान करेंगे। उनका कहना है कि बस दिन में दो घंटे अभ्यास की छूट मिल जाए, तो उनका भविष्य संवर जाएगा।
अभ्यर्थी लक्ष्मी राजपूत ने कहा कि हम किसी तरह की सुविधा नहीं, बस अपने पैरों के नीचे सुरक्षित जमीन मांग रहे हैं। सड़कों पर दौड़ते हुए हमेशा गाड़ियों और चोट का डर लगा रहता है। बहतराई स्टेडियम या पुलिस ग्राउंड में अभ्यास का निश्चित समय मिल जाए तो हम बिना किसी भय के अपनी तैयारी पूरी कर सकेंगे।
अभ्यर्थी श्रीकांत का कहना है कि मैदान के अभाव में कई साथी चोटिल होकर भर्ती की दौड़ से बाहर हो रहे हैं। हमारे पास महंगे निजी क्लब जाने के साधन नहीं हैं। प्रशासन यदि ग्राउंड में अभ्यास की छूट दे दे, तो जिले के दर्जनों युवाओं का वर्दी पहनने और सरकारी सेवा में जाने का सपना साकार हो जाएगा।




