BIG BREAKING: जशपुर में राइस मिल घोटाला – 15 हजार क्विंटल से ज्यादा चावल का गबन, शासन को 4 करोड़ से अधिक का नुकसान

जशपुर / जशपुर जिले के पत्थलगांव क्षेत्र के जोराडोल गांव में संचालित एक राइस मिल से करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। द्वारिका राइस मिल के संचालक अनिल जिंदल पर शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने और बड़ी मात्रा में चावल के गबन का आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, अनिल जिंदल द्वारा क्षेत्र में दो राइस मिलों का संचालन किया जा रहा था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने जशपुर विपणन विभाग के साथ एफसीआई और नान के तहत धान मिलिंग का अनुबंध किया था। इस अनुबंध के तहत दोनों मिलों के लिए क्रमशः 32 हजार और 64 हजार क्विंटल धान की मिलिंग तय की गई थी। विपणन विभाग द्वारा राइस मिलर को 21,213 और 32,021 क्विंटल धान उठाव के लिए डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जारी किया गया, जिसे मिलर ने पूरा उठा लिया। नियमानुसार धान की मिलिंग के बाद लगभग 70 प्रतिशत चावल शासन को जमा करना अनिवार्य होता है।
लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी मिलर द्वारा पूरी मात्रा में चावल जमा नहीं किया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार कुल 53,234 क्विंटल धान उठाव के मुकाबले अब तक केवल 22,757 क्विंटल चावल ही शासन को जमा कराया गया है।
इस तरह लगभग 15 हजार क्विंटल से अधिक चावल का गबन सामने आया है, जिसकी कीमत 4 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इस पूरे मामले से छत्तीसगढ़ शासन को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि वर्ष 2024-25 में चावल जमा नहीं करने पर विभाग ने राइस मिल को सील भी कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक राइस मिलर के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


इस संबंध में जिला विपणन विभाग के अधिकारी शंभू गुप्ता ने बताया कि राइस मिलर को 30 अप्रैल तक का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा तक चावल जमा नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इधर, जब इस मामले की पड़ताल के लिए मौके पर जाकर देखा गया तो राइस मिल पर ताला लटका मिला। ग्रामीणों ने बताया कि इस वर्ष न तो मिल का संचालन हुआ है और न ही वहां धान की मिलिंग का कार्य किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मिल बंद पड़ी है, तो धान की मिलिंग कहां हुई और चावल कहां गया।
अब देखने वाली बात होगी कि करोड़ों के इस घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।





