EOW/ACB केस में रामगोपाल अग्रवाल को हाईकोर्ट से मिली जमानत, लंबी न्यायिक हिरासत बनी आधार

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर सेंट्रल जेल में बंद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। दोनों के बीच लगभग 10 मिनट तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद जेल से बाहर आकर भूपेश बघेल ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि वे रामगोपाल अग्रवाल से मिलने आए थे, जो कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामगोपाल अग्रवाल को गलत तरीके से जेल में बंद करके रखा गया है।
बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कुल 6 मामले दर्ज हैं। इनमें से 2 मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि 4 मामले अभी भी लंबित हैं। रिजवी ने बताया कि इन चारों लंबित मामलों में जमानत मिलने के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो पाएगी। वकील रिजवी ने यह भी दावा किया कि किसी भी प्राथमिकी (FIR) में रामगोपाल अग्रवाल का नाम नहीं है और उन्हें पहले से अपराधी एक आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनीतिक बताते हुए कहा कि कांग्रेस कोषाध्यक्ष होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान एक बड़ा खुलासा किया था। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुटाए गए लगभग 860 से 880 करोड़ रुपए रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाए गए थे। ईडी का दावा है कि यह पैसा रामगोपाल अग्रवाल की निगरानी में कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाया गया था। इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है, जिनकी कीमत लगभग 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है। ईडी ने 8 अक्टूबर को इन संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया था, जिसके बाद 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष PMLA कोर्ट में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई थी। रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी की जांच के अनुसार, शराब सिंडिकेट से प्राप्त होने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह पैसा रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाया जाता था। वहां यह कैश रामगोपाल अग्रवाल के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को सौंपे जाने का दावा किया गया है। ईडी के मुताबिक, इस पूरे लेनदेन में लगभग 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में थे, और इस रकम को उनके निर्देश पर रखने, इस्तेमाल करने या बांटने का आरोप है। ईडी ने अपने दावों के समर्थन में डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों का हवाला दिया है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले और उससे जुड़े मामलों में हाईकोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को नियमित जमानत दे दी है। दोनों जुलाई 2026 से अलग-अलग मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। हाईकोर्ट ने लंबे समय से जेल में रहने, दस्तावेजी साक्ष्यों और बड़ी संख्या में गवाहों के कारण ट्रायल में लगने वाले संभावित समय को जमानत का आधार माना है।
रामगोपाल अग्रवाल को EOW/ACB में दर्ज FIR नंबर 4/2024 में आरोपी बनाया गया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मूल FIR में उनका नाम नहीं था और उन्हें आठवीं पूरक चार्जशीट में आरोपी बनाया गया। उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री या कैश भी बरामद नहीं हुआ था।
वहीं, अरुणपति त्रिपाठी पर सीएसएमसीएल में मैनपावर एजेंसियों के बिलों में ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त कार्यदिवसों के नाम पर अनियमित भुगतान की व्यवस्था बनाने और कमीशन वसूली में भूमिका निभाने का आरोप है। त्रिपाठी को देश नहीं छोड़ने और अन्य शर्तों पर जमानत मिली है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन गवाहों के बयान और कथित लेन-देन के साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी अभियोजन के गवाहों के बयान शुरू नहीं हुए हैं और मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि उनके खिलाफ कोई बरामदगी लंबित नहीं है और कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच कर रही है। ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) में प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसमें 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया था।
यह सिंडिकेट फरवरी 2019 में बनाया गया था। कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाने के लिए फरवरी 2019 में रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के 3 डिस्टलरी मालिकों को बुलाया था। इस बैठक में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए। साथ ही वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया भी पहुंचे थे। इस मीटिंग में इनके अलावा एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे।




