Uncategorized

बस्तर बाढ़: 7 दिन बाद भी 638 परिवार बेघर, एनएच-30 किनारे त्रिपाल में गुजर रही जिंदगी

बस्तर में आई भीषण बाढ़ की तबाही को 7 दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और लालफीताशाही के बीच प्रभावित परिवारों की जिंदगी पटरी पर नहीं लौट पाई है। बारिश तो थम गई, लेकिन 638 से अधिक परिवारों के आशियाने छिन चुके हैं। पानी उतरने के बाद भी जिनके सिर से छत छिन गई है, वे एनएच-30 के किनारे त्रिपाल और पन्नी तानकर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।

अब पटवारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद प्रशासन जागा है। नुकसान का सर्वे शुरू हुआ है। प्रशासनिक दावों की मानें तो सर्वे पूरा होने में 3 दिन लगेंगे। उसके बाद मुआवजा वितरण में 10 से 12 दिनों का समय और लगेगा। यानी कम से कम दो हफ्तों तक इन बेघर परिवारों को सड़क किनारे ही धूप और धूल फांकते हुए राहत राशि का इंतजार करना होगा।

इधर, बाढ़ का पानी उतरा। कई परिवारों के पास लौटने के लिए चार दीवारें तक नहीं बचीं। एनएच-30 के किनारे प्लास्टिक की पन्नी लगाकर रह रहे परिवारों में मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुले में रहने को मजबूर हैं। बारिश थमी, लेकिन उड़ती धूल और तेज धूप ने जीना दुश्वार कर रखा है।

भीगे हुए मलबे से अपने घरेलू सामान को तलाशते पीड़ितों का कहना है कि मुआवजा मिलने और दोबारा घर खड़ा होने के बाद ही जिंदगी सामान्य हो सकेगी। सरकारी प्रक्रिया की गति बेहद धीमी है।

जिले का पूरा राजस्व अमला बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे में जुटा है। हम जल्द से जल्द बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा बांटने के लिए सर्वे रिपोर्ट आते ही फाइलें तैयार कर आगे बढ़ा रहे हैं। – हीरा गवरना, डिप्टी कलेक्टर, बस्तर

पटवारियों की हड़ताल खत्म होते ही गुरुवार से राजस्व अमले ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे शुरू कर दिया है। राहत की बात केवल इतनी है कि इस बार प्रक्रिया से लालफीताशाही हटाई गई है: कागजातों की जरूरत नहीं – जमीन, मकान या क्षति से जुड़े किसी दस्तावेज को दिखाने की बाध्यता नहीं होगी। मौखिक पूछताछ से सर्वे – पटवारी मौके पर पहुंचकर सीधे प्रभावित परिवार से नुकसान की जानकारी ले रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का सत्यापन – शहरी इलाकों में पार्षद और ग्रामीण क्षेत्रों में पंच/सरपंच की रिपोर्ट और पुष्टि को ही पर्याप्त मानकर प्रकरण आगे बढ़ाया जा रहा है।

पूर्णतः ध्वस्त (जमींदोज): 128 परिवार पूरी तरह बेघर, एनएच किनारे पन्नी में रहने को मजबूर। आंशिक क्षतिग्रस्त: 510, दीवारें व छतें टूटीं, लोग खुद मलबा हटाकर रहने की कोशिश में। कुल प्रभावित मकान: 638, सर्वे के बाद राहत राशि तय करने की प्रक्रिया जारी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!