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बलौदाबाजार के गौठान में 20 से ज्यादा गायों के शव सड़ी-गली हालत में मिले, जांच शुरू

बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ब्लॉक के सूरजपुरा गांव में बने एक गौठान में 20 से ज्यादा गायों के शव सड़ी-गली हालत में मिले हैं। कई शवों को कुत्ते नोचकर ले गए, जबकि कुछ जगहों पर गायों के सिर्फ कंकाल मिले हैं। यह गौठान कांग्रेस सरकार के समय बनाया गया था और फिलहाल बंद पड़ा है।

गौ सेवकों के मुताबिक गौठान में करीब 200 गायें बंद थीं, जहां न तो चारा और न ही पानी की व्यवस्था थी। उनका दावा है कि भूख-प्यास से गायों की मौत हुई है। फसल बर्बाद करने के कारण गांव वाले आवारा मवेशियों को गौठान के अंदर बंद कर देते हैं।

गौ सेवक अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक, वे एक घायल गाय की तलाश करते हुए रात में गौठान पहुंचे थे। वहां गौठान के सामने दो गायें मरी पड़ी थीं, जिन्हें आवारा कुत्ते नोच रहे थे। उन्होंने बताया कि गौठान के अंदर जाने पर करीब 200 गायें भूखी-प्यासी हालत में पड़ी मिलीं। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया।

गौ सेवकों का आरोप है कि गौठान में पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और गायों को वहां छोड़ दिया गया था। इसी वजह से 15 से 20 गायों की मौत हुई है। गौ सेवकों ने इसे पशु क्रूरता का मामला बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

घटना की सूचना मिलते ही भाटापारा तहसीलदार यशवंत राज, जनपद पंचायत सीईओ हिमांशु वर्मा और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। टीम ने मृत गायों के शवों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि गायों की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच रिपोर्ट के आधार पर मौत की वास्तविक वजह सामने आएगी।

प्रशासन ने फिलहाल मृत गायों की संख्या और मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया है। मामले की जांच शुरू की गई है। अधिकारी गायों की मौत के कारण और मृत पशुओं की वास्तविक संख्या की जांच कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले टेहका गांव में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से 100 से ज्यादा सूअरों की मौत हुई थी। इसके बाद अब सूरजपुरा गौठान में गायों की मौत की घटना सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

इससे जुड़ी एक अन्य खबर में, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में परसा-भकुरा गांव के लोग गुरुवार को करीब 50 आवारा मवेशियों को हांकते हुए कलेक्टोरेट पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से आवारा मवेशियों से परेशान हैं। मवेशी खेतों में घुसकर फसल खराब कर रहे हैं और सड़कों पर बैठे रहने से हादसों का खतरा भी बना रहता है।

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