छत्तीसगढ़

एक लाइसेंस की आड़ में तीन मिलों का संचालन, सरकारी डिपो की जगह आरा मिल पहुंची थी सरकारी साल की लकड़ियां


रायपुर वन मंडल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर में एक लाइसेंस की आड़ में संचालित तीन अवैध आरा मिलों को सील कर दिया है। कोरबा से तस्करी कर लाई गई सरका…और पढ़ें

Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 10:56:17 AM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 10:58:14 AM (IST)

एक लाइसेंस की आड़ में तीन मिलों का संचालन, सरकारी डिपो की जगह आरा मिल पहुंची थी सरकारी साल की लकड़ियां
मामनचंद हुकुमचंद सा मिल में पहुंची वन विभाग की टीम। नईदुनिया

HighLights

  1. रायपुर वन मंडल ने अवैध आरा मिल सील
  2. सरकारी साल लकड़ी तस्करी की जांच हुई तेज
  3. खरीदारों और नेटवर्क पर वन विभाग की नजर

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। सरकारी साल की लकड़ी की तस्करी की जांच अब बड़े नेटवर्क तक पहुंच गई है। प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) के निर्देश पर राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की चार टीमें जिला वन अधिकारी (डीएफओ) के नेतृत्व में अभनपुर स्थित मामनचंद हुकुमचंद सा मिल पहुंचीं। जांच के दौरान एक लाइसेंसशुदा सा मिल की आड़ में संचालित तीन अवैध आरा मिलों का खुलासा हुआ, जिन्हें मौके पर ही सील कर दिया गया। यह कार्रवाई अरण्य भवन के बड़े अधिकारियों की फटकार से रायपुर वन मंडल हरकत में आकर जांच शुरू की है।

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कोरबा जिले की शासकीय भूमि से काटी गई साल की लकड़ी, जिसे वन विभाग के डिपो तक पहुंचना था, उसे कथित रूप से तस्करी कर अभनपुर लाया गया। इसी लकड़ी की खरीदी, भंडारण और चिराई को लेकर अब जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई दो दिन पहले अभनपुर के समीप आमनेर गांव में करीब 40 ट्रक के बराबर अवैध साल लकड़ी का भंडारण मिलने के बाद की गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह दोनों मामले आपस में जुड़े हो सकते हैं और जांच अब केवल अवैध कटाई तक सीमित न रहकर खरीद-फरोख्त और परिवहन के पूरे नेटवर्क तक पहुंच गई है।

लाइसेंस वैध, लेकिन लकड़ी के दस्तावेजों पर सवाल

जांच के दौरान संबंधित सा मिलों के लाइसेंस और मशीनें वैध पाई गईं, लेकिन परिसर में रखी साल की लकड़ी के दस्तावेजों में कई विसंगतियां मिली हैं। वन विभाग अब यह सत्यापित कर रहा है कि लकड़ी किस क्षेत्र से लाई गई, परिवहन की अनुमति किस आधार पर जारी हुई और प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं। दस्तावेजों के मिलान के लिए खरीदी रजिस्टर, परिवहन अनुमति और स्टाक का परीक्षण किया जा रहा है।

अब खरीदार भी जांच के दायरे में

वन विभाग का कहना है कि अवैध लकड़ी के कारोबार में केवल कटाई करने वाले ही नहीं, बल्कि उसे खरीदने, संग्रहित करने और चिराई कराने वाले भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। इसी वजह से जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से सरकारी लकड़ी खरीदी या उसका उपयोग किया।

की जाएगी सख्त कार्रवाई

सा मिलों के लाइसेंस वैध हैं, लेकिन वहां रखी लकड़ी के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में लकड़ी की खरीदी अवैध पाई जाती है या दस्तावेज फर्जी और नियमों के विपरीत पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोकनाथ पटेल, डीएफओ रायपुर



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