छत्तीसगढ़

आयुष्मान कार्ड पर निजी अस्पतालों की मनमानी? मरीजों से वसूली के आरोप



भास्कर न्यूज | कांटाबाजी ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 1 जून को पत्र क्रमांक AB PMJAY/GJAY /HFW/ SHAS /(QC)-249 /251279/H जारी कर पड़ोसी राज्यों के निजी अस्पतालों को आयुष्मान कार्डधारकों को बिना किसी बाधा उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने भी स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इन निर्देशों के बाद उम्मीद थी कि बेहतर इलाज के लिए छत्तीसगढ़ जाने वाले ओडिशा के हजारों मरीजों को आयुष्मान योजना का निर्बाध लाभ मिलेगा। हालांकि, आरोप है कि छत्तीसगढ़ के कई निजी अस्पताल अब भी इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। आरोपों के अनुसार, कई अस्पताल ओडिशा का आयुष्मान कार्ड तत्काल स्वीकार करने के बजाय पहले मरीजों से इलाज का पूरा खर्च जमा कराते हैं और बाद में कार्ड का उपयोग करने की बात कहते हैं। कुछ अस्पताल भर्ती के समय जांच और टेस्ट को योजना से बाहर बताकर अलग से राशि वसूलते हैं, जबकि कुछ मरीजों को यह कहकर बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए पर्ची थमा देते हैं कि संबंधित दवाएं आयुष्मान योजना में शामिल नहीं हैं। हमारी टीम की पड़ताल में रायपुर के 10 से अधिक निजी अस्पतालों में इस तरह की शिकायतें सामने आईं। आरोप है मरीजों से कई अस्पताल अतिरिक्त राशि वसूल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ओडिशा के बलांगीर जिले के बंगोमुंडा क्षेत्र के पत्रकार अशोक नारायण भोई का है। परिजनों के अनुसार, रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती के समय आयुष्मान कार्ड से इलाज का अनुरोध करने पर अस्पताल ने रात होने का हवाला देकर प्रक्रिया अगले दिन करने की बात कही, लेकिन इलाज नकद राशि लेकर जारी रखा गया। उपचार के दौरान अशोक नारायण भोई का निधन हो गया और उनके परिवार को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल सका। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को इलाज के लिए लगभग 40 हजार रुपये जमा करने पड़े। यह कहना संभव नहीं कि आयुष्मान कार्ड से उपचार होने पर उनकी जान बच जाती, लेकिन यदि योजना का लाभ समय पर मिल जाता तो इलाज पर खर्च हुई राशि परिवार के लिए बड़ी आर्थिक राहत साबित हो सकती थी। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच ओडिशा के लोगों को सलाह दी जा रही है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी निजी अस्पताल में भर्ती होने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वहां ओडिशा का आयुष्मान कार्ड स्वीकार किया जा रहा है या नहीं। अन्यथा आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है। केंद्र और ओडिशा, दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद यदि आयुष्मान योजना का लाभ प्रभावी ढंग से नहीं मिल पा रहा है, तो कुछ लोग पूर्व सरकार की बीजू स्वास्थ्य कार्ड योजना को याद कर रहे हैं, जिसके तहत उन्हें अपेक्षाकृत कम परेशानी में उपचार मिलने का अनुभव रहा था।



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