छत्तीसगढ़

5वीं के बाद छूटी पढ़ाई, कोरोना में बदला इरादा… मजदूरी छोड़ी, किताब पकड़ी और बन गया रायपुर में पुलिस आरक्षक


यह कहानी केवल एक सफलता की नहीं, बल्कि हार न मानने वाले उस जज्बे की है जो साबित करती है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती और सपनों की कोई सीमा नहीं। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 05 Apr 2026 04:01:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Apr 2026 04:01:50 PM (IST)

5वीं के बाद छूटी पढ़ाई, कोरोना में बदला इरादा... मजदूरी छोड़ी, किताब पकड़ी और बन गया रायपुर में पुलिस आरक्षक
छत्तसीगढ़ में ईंट भट्ठे की तपन से निकला खाकी का सितारा।

HighLights

  1. छत्तसीगढ़ में ईंट भट्ठे की तपन से निकला खाकी का सितारा
  2. 8 साल की मजदूरी के बाद पुलिस आरक्षक बना देवा डहरिया
  3. लगातार असफलताओं के बाद 2026 में मिली पुलिस की वर्दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। हाथों में ईंटों का बोझ और माथे पर पसीने की बूंदें, कुछ साल पहले तक सक्ती जिले के युवक देवा डहरिया की यही नियति थी। जिस उम्र में बच्चे भविष्य के सपने बुनते हैं, उस उम्र में गरीबी के कारण देवा ने कलम छोड़कर मजदूरी का रास्ता चुना। पर कहते हैं न, वक्त हर घाव को भरने के साथ एक मौका भी देता है। 2020 में कोरोना की आपदा देवा के लिए एक ऐसा अवसर लेकर आई जिसने उसकी तकदीर बदल दी।

करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद जब उसने फिर से किताबों का साथ पकड़ा तो दुनिया के लिए वह सिर्फ एक ‘मजदूर’ था, लेकिन उसके भीतर एक जुनून सुलग रहा था। उसी जुनून का परिणाम है कि ईंट भट्ठे की तपन से निकला देवा आज समाज की सुरक्षा के लिए पुलिस आरक्षक बन गया है। वह रायपुर में डीसीपी के अंडर ट्रेनिंग ले रहा है। यह कहानी केवल एक सफलता की नहीं, बल्कि हार न मानने वाले उस जज्बे की है जो साबित करती है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती और सपनों की कोई सीमा नहीं।

गरीबी ने छीनी पढ़ाई, मजदूरी बना सहारा

देवा का बचपन बेहद अभावों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि महज 5वीं के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। घर का खर्च चलाने के लिए दूसरे राज्यों में जाकर ईंट भट्ठों पर काम करना पड़ा। दिन-रात मेहनत के बाद भी परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। पर्याप्त आमदनी थी न ही समाज में सम्मान।

दोस्त ने दिया साथ, ओपन स्कूल से 10वीं पास की

साल 2020 में कोरोना के चलते काम बंद हो गया। देवा गांव लौट आए।। दोस्त रोशन खुटे ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के बारे में बताया। देवा ने इस मौके को अपनी जिंदगी बदलने का जरिया बनाया और आठ साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से पढ़ाई शुरू की। कोरोना काल में ही 10वीं की परीक्षा पास कर नई शुरुआत की।

तानों के बीच शुरू हुआ संघर्ष

दोबारा पढ़ाई शुरू की तो ग्रामीणों ने मजाक उड़ाया। कहने लगे- तुमसे नहीं हो पाएगा, समय बर्बाद कर रहे हो। देवा ने इन बातों को नजरअंदाज किया और दोस्त रोशन खुटे के भरोसे पर आगे बढ़ते रहे। साल 2023 में जैजैपुर स्थित हंसल एकेडमी में कोचिंग शुरू की। लाइब्रेरी में घंटों समय बीताने लगा। प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के दौरान गणित और रीजनिंग में दिक्कतें आईं, लेकिन दिलीप देवांगन और सुरेश साहू के मार्गदर्शन में उन्होंने कांसेप्ट के जरिये पढ़ाई को समझा, जिससे कठिन विषय भी आसान लगने लगे।

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लगातार असफलताओं के बाद मिली सफलता

देवा ने पुलिस भर्ती से पहले आर्मी, एसएससी जीडी और नगर सैनिक की परीक्षाएं दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। इन असफलताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि और ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा दी। लगातार तीन वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद आखिरकार साल 2026 में देवा डहरिया का चयन रायपुर जिले में पुलिस आरक्षक के पद पर हो गया।



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