छत्तीसगढ़

14-16 सप्ताह के गर्भपात की हाईकोर्ट ने दी अनुमति, सुरक्षित रहेगा डीएनए सैंपल


पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि यह गर्भ उसे गहरा मानसिक आघात और सामाजिक अपमान पहुंचा रहा है, इसलिए उसे गर्भपात कराने की अनुमत …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 21 May 2026 09:05:15 PM (IST)Updated Date: Thu, 21 May 2026 09:09:17 PM (IST)

छत्‍तीसगढ़ में दुष्कर्म पीड़िता के पक्ष में फैसला: 14-16 सप्ताह के गर्भपात की हाईकोर्ट ने दी अनुमति, सुरक्षित रहेगा डीएनए सैंपल
दुष्‍कर्म पीडि़ता का गर्भपात।

HighLights

  1. जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने कहा।
  2. पीड़िता को निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
  3. अब वह गर्भ जारी रखना चाहती है या नहीं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एक दुष्कर्म पीड़िता को उसके 14-16 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पीड़िता पर उस गर्भ को रखने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता, जो उसकी सहमति के बिना और क्रूरता के फलस्वरूप ठहरा हो।

यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ द्वारा रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया। पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है। याचिकाकर्ता कुछ महीने पहले जबरन शारीरिक संबंध की शिकार हुई थी। इस कृत्य के कारण वह गर्भवती हो गई।

पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि यह गर्भ उसे गहरा मानसिक आघात और सामाजिक अपमान पहुंचा रहा है, इसलिए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दी जाए।

न्यायालय के पूर्व आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर की टीम ने पीड़िता का परीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गर्भ 14 से 16 सप्ताह का बताया गया था।

सर्वोच्च अदालत के फैसलों का हवाला

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने चिकित्सकीय गर्भ समापन अधिनियम, 2021 और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में पारित नजीरों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि यदि गर्भ का कारण बलात्कार है, तो उससे होने वाली मानसिक पीड़ा महिला के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चोट है और पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भ जारी रखे या नहीं।

हाई कोर्ट के मुख्य दिशा-निर्देश

  • पीड़िता को तत्काल जिला अस्पताल या बड़े अस्पताल जहां आईसीयू सुविधाएं हों।
  • वहां भर्ती कर विशेषज्ञ डाॅक्टरों की देखरेख में गर्भपात की प्रक्रिया पूरी की जाए।
  • डीएनए सैंपल का संरक्षण: चूंकि आरोपित के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है।
  • इसलिए डाॅक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे भ्रूण का डीएनए सैंपल अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखें।
  • ताकि कोर्ट ट्रायल में इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
  • अदालत ने इस आदेश की प्रति तत्काल कलेक्टर, सीएमएचओ और डीन सीआइएमएस को त्वरित अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं।



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