Uncategorized

टाटा मोटर्स को लगा तगड़ा झटका: खराब सर्विसिंग और तकनीकी दोष के चलते उपभोक्ता आयोग ने लगाया भारी जुर्माना

बिलासपुर के निवासी स्वप्न कुमार दत्ता ने टाटा मोटर्स की टाटा पंच ईवी कार खरीदी थी, लेकिन वाहन में शुरुआत से ही तकनीकी समस्याएं आने लगीं। शिकायत के अनुसार, कार की बैटरी रेंज कंपनी के दावों के विपरीत काफी कम थी और इसमें बार-बार अन्य तकनीकी खराबी भी सामने आ रही थी। इन समस्याओं के समाधान के लिए वाहन को कई बार सर्विस सेंटर ले जाया गया और सुधार के प्रयास किए गए।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित ग्राहक ने लगभग 10 बार कार की सर्विसिंग कराई। इतनी बार मरम्मत और सर्विसिंग होने के बावजूद गाड़ी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और तकनीकी खामियां बरकरार रहीं। बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर काटने और वाहन के सही ढंग से काम न करने के कारण ग्राहक को काफी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

परेशान होकर स्वप्न कुमार दत्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में टाटा मोटर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने वाहन में मौजूद दोषों और कंपनी द्वारा प्रदान की गई सेवाओं में कमी का स्पष्ट उल्लेख किया। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया था और कंपनी को भुगतान का आदेश दिया था।

जिला उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के खिलाफ टाटा मोटर्स ने छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी। राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस अपील पर विस्तृत सुनवाई की और टाटा मोटर्स की ओर से दी गई दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि 10 बार सर्विसिंग के बाद भी वाहन का ठीक न होना सेवा में बड़ी लापरवाही और उत्पाद में तकनीकी दोष को प्रमाणित करता है।

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में टाटा मोटर्स को पीड़ित ग्राहक को कुल 16.25 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह राशि वाहन की कीमत और ग्राहक को हुई परेशानियों के मुआवजे के तौर पर निर्धारित की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं प्रदान करना कंपनी की वैधानिक जिम्मेदारी है, जिसमें इस मामले में विफलता पाई गई है।

इस फैसले से उन वाहन स्वामियों को बड़ी राहत मिली है जो नई गाड़ियों में आने वाली तकनीकी खराबी और कंपनियों की लचर सर्विसिंग से जूझते हैं। उपभोक्ता आयोग का यह कड़ा रुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे ग्राहकों को दोषपूर्ण उत्पाद बेचकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हैं। मामले में टाटा मोटर्स की अपील खारिज होने के बाद अब उन्हें निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!