सालाना 25 लाख खर्च, फिर भी बदहाल गोवंश! 260 की जगह ठूंसे 600 मवेशी; सरकारी पैसों की बंदरबांट में तड़प रहा छत्तीसगढ़ प्रदेश का गोधन

छत्तीसगढ़ में प्रति गोशाला 25 लाख रुपये के वार्षिक सरकारी अनुदान के बावजूद अव्यवस्थाओं के कारण गोवंश की मौतें हो रही हैं। क्षमता से अधिक मवेशियों को र…और पढ़ें

HighLights
- प्रति गोशाला 25 लाख अनुदान के बाद भी व्यवस्था बदहाल।
- क्षमता से अधिक मवेशियों के जमावड़े से लगातार मौतें।
- 1460 के लक्ष्य में से केवल 42 गोधाम ही संचालित।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर : प्रदेश में बेसहारा मवेशियों के संरक्षण और देखभाल के लिए राज्य सरकार एक गोशाला पर प्रतिवर्ष करीब 25 लाख रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद गोशालाओं में अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। क्षमता से अधिक मवेशियों को रखे जाने के कारण उन्हें पर्याप्त चारा, पानी और सुरक्षित आश्रय नहीं मिल पा रहा है।
रायपुर, बेमेतरा और बिलासपुर जिलों में बेसहारा मवेशियों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। प्रदेश में कुल 153 गोशालाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 137 वर्तमान में संचालित हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन गोशालाओं में 42,112 पशुधन संरक्षित हैं। यानी औसतन एक गोशाला में 300 से अधिक मवेशी रखे जा रहे हैं। रायपुर के फुंडहर गोठान में हाल ही में सात मवेशियों की मौत का मामला सामने आया था।
260 मवेशियों की क्षमता वाले इस गोठान में करीब 600 मवेशियों को रखा गया था। वहीं, बिलासपुर के मस्तूरी-पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम ओखर स्थित सुरभि गोधाम में छह मवेशियों की मौत हुई है। लगातार बारिश के बाद परिसर दलदल में बदल गया था।
आरोप है कि 200 से अधिक बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित और सूखे स्थान पर ले जाने के बजाय कीचड़ में ही छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि गोशालाओं में पशुओं की संख्या के अनुरूप खुली और ढकी हुई जगह, हवादार शेड, पर्याप्त चारा-पानी और बेहतर जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है।
बीमार और घायल पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सक, अलग आइसोलेशन कक्ष, समय पर टीकाकरण और डीवार्मिंग की व्यवस्था भी अनिवार्य होनी चाहिए। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ बारिश के दौरान जलभराव और दलदल की स्थिति से बचाव के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाने चाहिए।
गोधाम योजना की रफ्तार भी धीमी
बेसहारा मवेशियों को संरक्षण देने के उद्देश्य से शुरू की गई राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गोधाम योजना भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। कुछ गोपालक गायों के दूध देना बंद करने के बाद उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। इसके बाद ये मवेशी भोजन और आश्रय की तलाश में भटकते रहते हैं और कई बार सड़क हादसों का शिकार हो जाते हैं।
एक नजर में गोधाम योजना
- 6 अगस्त 2025 को शुरुआत
- 1460 गोधाम खोलने की बनी है कार्ययोजना
- 151 को अब तक मिली प्रशासकीय स्वीकृत
- 88 गोधाम गोसेवा आयोग से हुए पंजीकृत
- 42 गोधाम प्रदेशभर में हो रहे संचालित
- 25 लाख एक गोधाम को अनुदान देने का प्रविधान
गोशालाओं में मवेशियों की मौत की जानकारी नहीं है। बेमेतरा की संबंधित गोशाला पंजीकृत नहीं है। गोशालाओं का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। गोठानों को गोधाम में बदला जा रहा है और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषर सिंह पटेल, अध्यक्ष, राज्य गोसेवा आयोग



