रथयात्रा में मेघ करेंगे प्रभु का स्वागत, मौसम विभाग की संभावना से भक्तों में उत्साह

छत्तीसगढ़ में रथ यात्रा का उत्साह चरम पर है। मौसम विभाग द्वारा वर्षा की संभावना को भक्त भगवान जगन्नाथ के स्वागत में प्रकृति का आशीर्वाद मान रहे हैं। उ…और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर इस समय भक्ति का अनूठा ज्वार उमड़ पड़ा है। चारों ओर ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान है और हर भक्त के मन में प्रभु के दर्शन की अदम्य लालसा है। इस आध्यात्मिक उल्लास के बीच, छत्तीसगढ़ के मौसम का मिजाज भी प्रभु के स्वागत में पलकें बिछाए खड़ा प्रतीत हो रहा है। धमतरी, बस्तर, रायपुर, बिलासपुर से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, उमड़ते-घुमड़ते बादल ऐसा आभास करा रहे हैं मानो स्वयं प्रकृति देव भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ चलने को उत्सुक हैं।
मौसम विभाग द्वारा मेघगर्जन, आकाशीय बिजली और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के साथ वर्षा की जो संभावना जताई गई है। जो प्रभु के स्वागत में हो रहे शंखनाद और शीतल फुहारों के उत्सव की तरह लग रही है। ऐसा लगता है जैसे इंद्रदेव स्वयं आसमान से पुष्पवर्षा करने की तैयारी कर रहे हों।
शीतल फुहारों की संभावना से उत्साह
धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद और बस्तर के अंचलों में बारिश की संभावना धरती की प्यास तो बुझाएगी ही साथ-साथ रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए उपहार समान है। उमस भरी गर्मी में शीतल फुहारों की संभावना से भक्त उत्साहित हैं। जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और बिलासपुर तक बादलों का डेरे में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इस बार प्रकृति के सानिध्य में संपन्न हो रही है।

गायत्री नगर से निकलने वाली रथयात्रा के अलग-अलग रंगों के रथ व उन्हें खींचने वाली रस्सी।
राजधानी में तैयारी पूरी
राजधानी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ निकलेगी। शहर के गायत्री नगर, पुरानी बस्ती, टूरी हटरी, सदर बाजार सहित विभिन्न क्षेत्रों में रथयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और मंदिरों में अंतिम चरण की धार्मिक तैयारियां जारी हैं।
सोने के झाड़ू से बहारा जाएगा मार्ग
रायपुर की रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर की वह परंपरा है, जिसमें महाप्रभु के रथ मार्ग का शुद्धिकरण साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा-सवा किलो वजनी दो स्वर्ण झाड़ुओं से किया जाता है। ये झाड़ू पूरे वर्ष तिजोरी में सुरक्षित रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं। परंपरा के अनुसार एक स्वर्ण झाड़ू राज्यपाल और दूसरी मुख्यमंत्री के हाथ में होती है। दोनों महाप्रभु के रथ के आगे झाड़ू लगाकर पुरी की प्रसिद्ध ‘छेरा पहरा परंपरा का निर्वहन करते हैं।
2003 से पुरी धाम की तर्ज पर
मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि गायत्री नगर में वर्ष 2003 से पुरी धाम की तर्ज पर रथयात्रा निकाली जा रही है। पुरी में जिस प्रकार गजपति महाराज स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की सफाई करते हैं, उसी परंपरा को रायपुर में भी निभाया जा रहा है। रथयात्रा को पुरी जैसा स्वरूप देने के लिए इस वर्ष भी ओडिशा से आए कलाकार मंदिर परिसर, प्रवेश द्वार और रथों को पारंपरिक शैली की चित्रकला और धार्मिक अलंकरण से सजा रहे हैं। वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना तथा रथयात्रा के सभी वैदिक अनुष्ठानों के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है।




