छत्तीसगढ़

रायपुर के आरंग में संस्कृति विभाग को मिली बड़ी सफलता, मिलीं 100 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां


भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत को सहेजने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत आरंग में एक महत्वपूर्ण …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 13 May 2026 08:27:10 AM (IST)Updated Date: Wed, 13 May 2026 08:27:10 AM (IST)

रायपुर के आरंग में संस्कृति विभाग को मिली बड़ी सफलता, मिलीं 100 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां
पांडुलिपियों को दिखाते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी व अन्य (नईदुनिया)

HighLights

  1. आरंग में 100 साल पुरानी पांडुलिपियां बरामद
  2. ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत बड़ी उपलब्धि
  3. कई रहस्य खोलेंगी ये 100 साल पुरानी पांडुलिपियां

नईदुनिया न्यूज, आरंग। भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत को सहेजने के उद्देश्य से भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ज्ञान भारतम मिशन के तहत आरंग में एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। कलेक्टर डा. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान अग्रवाल पारा निवासी व्यवसायी दीपक साहेब और उनकी पत्नी शीला गुरु गोस्वामी के घर से लगभग 100 साल पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी आरंग दिनेश शर्मा को जानकारी देते हुए गुरु गोस्वामी परिवार ने बताया कि ये अनमोल पांडुलिपियां उनके परदादा स्व. भैया साहेब एवं स्व. भाऊ साहेब द्वारा लिखी गई थीं। उस दौर में उनके पूर्वज सात्विक ज्ञान यज्ञ, सत्संग, चौका और आरती जैसे आध्यात्मिक कार्यों में लीन रहते थे।

शोध का विषय हो सकती हैं ये पांडुलिपियां

आज भी इन पांडुलिपियों में समाहित ज्ञान भारतीय संस्कृति और परंपराओं का गौरव गान कर रहा है। उनका प्रमुख धर्म क्षेत्र छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध तीर्थ दामाखेड़ा है। यह पांडुलिपियां न केवल पारिवारिक धरोहर हैं, बल्कि कबीर पंथ और छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक इतिहास के लिए भी शोध का विषय हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद्भागवत गीता’ सहित कई प्राचीन पांडुलिपियां मिलीं

आरंग विकासखंड में दुर्लभ पांडुलिपियों को खोजने और उनके संरक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। इस दौरान विकासखंड स्त्रोत समन्वयक सुरेंद्र सिंह चंद्रसेन और नवाचारी शिक्षक महेंद्र कुमार पटेल एवं अरविंद कुमार वैष्णव शामिल रहे। प्रशासन का लक्ष्य इन दुर्लभ दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करना है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।



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