राम वनगमन पथ पर सियासत: साय सरकार की शोध आधारित योजना, विपक्ष ने उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। साय सरकार ने शोध के आधार पर 31 स्थलों को तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई है। इन स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई बनाई जाएगी।
राम वनगमन पथ का विकास तीन चरणों में पूरा होगा। छत्तीसगढ़ में कुल 31 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई का निर्माण प्रस्तावित है। सरकार ने इस योजना को शोध के आधार पर तैयार किया है।
वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित चंद्रखुरी मंदिर को इस सूची में शामिल न करने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चंद्रखुरी मंदिर को सूची से बाहर रखना आस्था की जगह चुनावी सियासत है।
इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष की ओर से योजना को शोध आधारित बताया जा रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहा है।
राम वनगमन पथ के तहत छत्तीसगढ़ में जिन 31 स्थलों को विकसित किया जाना है, उनमें आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यह विकास कार्य तीन चरणों में पूरा होगा।
चंद्रखुरी मंदिर को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रस्तावित इस स्थल को सूची में शामिल न करना आस्था के मामले में चुनावी सियासत को दर्शाता है।
गौरतलब है कि राम वनगमन पथ को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। साय सरकार की योजना के अनुसार 31 स्थलों का विकास तीन चरणों में किया जाएगा, जिसमें आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई का निर्माण प्रमुख है।




