पत्थलगांव में ‘जिज्ञासा’ विज्ञान पाठ्यपुस्तक पर 10 दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण संपन्न, नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण

पत्थलगांव/ एससीईआरटी (SCERT) रायपुर के निर्देशानुसार, विकासखंड पत्थलगांव (जिला जशपुर) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘जिज्ञासा’ विज्ञान नवीन पाठ्यपुस्तक पर आधारित विकासखंड स्तरीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 27 जून से 06 जुलाई 2026 तक चले इस दस दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में विकासखंड के विज्ञान शिक्षकों ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की।
प्रशिक्षण का स्वरूप और संचालन यह प्रशिक्षण गूगल मीट (Google Meet) प्लेटफॉर्म के माध्यम से कुल 20 सत्रों में आयोजित किया गया। शिक्षकों की सुविधा हेतु प्रशिक्षण को दो पालियों में विभाजित किया गया था: प्रथम पाली दोपहर 1:00 बजे से 2:30 बजे तक तथा द्वितीय पाली शाम 6:00 बजे से 7:30 बजे तक संचालित हुई। प्रतिदिन के कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके पश्चात शिक्षकों ने प्री-टेस्ट में भाग लिया और अपना दैनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इस प्रशिक्षण का सफल संचालन मास्टर ट्रेनर दिनेश कुमार साहू, उपेंद्र सोनवानी और महावीर तेली द्वारा किया गया।
प्रमुख विषय और तकनीकी सत्र प्रशिक्षण के दौरान शिक्षा के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई:
शैक्षणिक रूपरेखा: मास्टर ट्रेनर दिनेश कुमार साहू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, NCF 2023, पंचकोश के माध्यम से समग्र विकास और ‘जिज्ञासा’ विज्ञान पाठ्यपुस्तक की बारीकियों पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने ‘ब्लूम टैक्सनॉमी’, ‘हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड’ और भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान के महत्व को स्पष्ट किया।
कला एवं रचनात्मकता: उपेंद्र सोनवानी और महावीर तेली ने ‘कृति (कला शिक्षण)’ के अंतर्गत रंगमंच, कला और संगीत के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को साझा किया।
अधिगम एवं मानसिक स्वास्थ्य: अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के अविनाश ने शिक्षण-अधिगम, अनुभवात्मक शिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा और ICT आकलन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, नरेंद्र यादव ने शिक्षकों के ‘मानसिक स्वास्थ्य’ तथा दिनेश चौधरी ने ‘किशोरावस्था’ से संबंधित चुनौतियों व उनके समाधानों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
सक्रिय सहभागिता और रचनात्मकता प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने NEP 2020 के अनुरूप नवीन पाठ्यपुस्तक पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। शिक्षकों ने चार्ट निर्माण, गतिविधि आधारित वीडियो और ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपनी समझ प्रदर्शित की। विभिन्न शिक्षकों ने लोकगीत और प्रेरणादायी गीतों के माध्यम से प्रशिक्षण का वातावरण ऊर्जावान बनाए रखा। कार्यक्रम के अंतिम दिन सभी शिक्षकों ने अपना ऑनलाइन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और पोस्ट-टेस्ट पूर्ण किया।
समापन संदेश समापन सत्र को संबोधित करते हुए बीआरसीसी श्री जगन्नाथ पाढ़ी ने शिक्षकों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस पाठ्यपुस्तक का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति ‘जिज्ञासा’ को जागृत करना है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई नवाचारी पद्धतियों को आगामी सत्र में अपने विद्यालयों में सरल और सुलभ तरीके से लागू करें तथा अपने अनुभवों को सहकर्मियों के साथ साझा करें।




