छत्तीसगढ़
क्या पुलिस की गवाही पर भरोसा किया जा सकता है? नक्सल केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिया बड़ा जवाब


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी आरोपी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) या भारतीय दंड संहिता (IPC) की कुछ धाराओं से राहत मिल जाती है, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्य स्वतः कमजोर हो जाते हैं। यदि विस्फोटक रखने, ले जाने या उपयोग से जुड़े अपराध प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कानून के तहत दोषसिद्धि कायम रह सकती है।




