छत्तीसगढ़

जूनियर डॉक्टर खुद चुकाएं सीनियर्स का नाश्ता, मेडिकल कॉलेजों में टॉक्सिक कल्चर का भंडाफोड़, पढ़ें पूरी रिपोर्ट



डॉ. विष्णु दत्त, रिटायर्ड, डीएमई, छग में कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि पीजी फस्र्ट ईयर के छात्रों को काफी मेहनत की जरूरत होती है। चूंकि वे रेसीडेंट डॉक्टर होते हैं इसलिए इमरजेंसी में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी विभागों का माहौल खराब होता है, ऐसा भी नहीं है। ड्यूटी के घंटे तो फिक्स होते हैं, लेकिन इमरजेंसी कभी भी आ सकती है। इसलिए रेसीडेंट डॉक्टरों को हर समय ड्यूटी के लिए तैयार रहने की जरूरत होती है। पढ़ाई का माहौल होना ही चाहिए।



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!