छत्तीसगढ़
झोपड़ी और कला मंच में पढ़ने मजबूर नौनिहाल


cg patrika news. सरकार छत्तीसगढ़ में शिक्षा और पोषण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन बालोद जिले की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिले के 1531 आंगनबाड़ी केंद्रों में से लगभग 172 केंद्र जर्जर हो चुके हैं। इन केंद्रों की छतें टपकती हैं, दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है और फर्श बैठ चुका है। ऐसे में 3 से 6 साल के मासूम बच्चे खतरे के साये में पढऩे को मजबूर हैं। चिंताजनक बात यह है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के शासकीय बंगले चकाचक और सुविधाओं से लैस हैं, लेकिन जिन आंगनबाडिय़ों में देश का भविष्य तैयार होता है, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।




