‘जब भगवान खुद नहीं हटना चाहते तो क्यों हटाएं’?:खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर संतों का विरोध, देखें वीडियो – Khade Hanuman Stays Put! Ujjain Bridge Project Stuck As 1,000-year-old Idol Resists Relocation

शहर में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बन रही डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में बाधक बन रही श्री खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा का विस्थापन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। पिछले पांच दिनों से प्रशासन प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। इस घटना के सोशल मीडिया और रील्स पर वायरल होने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ गई है।
नगर निगम के उपायुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि प्रस्तावित सड़क मार्ग में आने वाले अधिकांश धार्मिक स्थलों को आपसी सहमति और चर्चा के बाद हटाया जा चुका है। श्री खड़े हनुमान मंदिर के पुजारी की सहमति और मार्गदर्शन में ही प्रतिमा के विस्थापन की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान प्रतिमा का तकनीकी परीक्षण कराना जरूरी महसूस हुआ। इसके लिए आधुनिक स्कैनिंग मशीन की मदद ली जा रही है। आगामी 2 से 4 दिनों में स्कैनिंग रिपोर्ट आने की उम्मीद है। रिपोर्ट मिलने के बाद सभी पक्षों की सहमति, आपसी समन्वय और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
पुरातत्वविद ने बताया परमारकालीन तकनीक का दावा
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, खड़े हनुमान जी की प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से बनी है। उनका दावा है कि यह प्रतिमा परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है।
डॉ. सोलंकी के मुताबिक, प्राचीन समय में लोहे और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता नहीं थी। उस दौर में पत्थरों में विशेष छेद कर ‘लॉकिंग सिस्टम’ के जरिए प्रतिमाओं और मंदिरों का निर्माण किया जाता था। उन्होंने प्रशासन को सुझाव दिया कि प्रतिमा को सुरक्षित विस्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विशेषज्ञ टीम से परामर्श लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी प्राचीन संरचनाओं को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने का विशेषज्ञों के पास अनुभव और तकनीक है।
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संतों और हिंदूवादी संगठनों ने जताया विरोध
प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बीच जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज ने खड़े हनुमान जी के दर्शन किए और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब खड़े हनुमान जी अपने स्थान से विस्थापित नहीं हो रहे हैं, तो प्रशासन उन्हें हटाने की इतनी कोशिश क्यों कर रहा है।
हिंदूवादी संगठनों के प्रतिनिधि रूपेश ठाकुर, संतोष व्यास, शिवेंद्र तिवारी और शैलू यादव ने भी प्रतिमा को हटाने का विरोध किया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मान्यता है कि वे खड़े हनुमान जी को अपना ‘डॉक्टर’ मानते हैं। उनका विश्वास है कि बच्चों की बीमारी या किसी संकट के समय भगवान के नाम का धागा बांधने और पूजा करने से राहत मिलती है।
सोशल मीडिया पर खबर वायरल, मंदिर में बढ़ी भीड़
प्रतिमा के नहीं हटने की खबर डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए फैलने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई। मंगलवार को मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। उज्जैन के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए फिलहाल भगवान के नाम से की जाने वाली ‘नजर उतारने’ की पारंपरिक प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। अब सभी की नजरें अगले 2 से 4 दिनों में आने वाली तकनीकी स्कैनिंग रिपोर्ट पर हैं। रिपोर्ट के बाद ही प्रशासन प्रतिमा के विस्थापन को लेकर अगला कदम तय करेगा।




