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दुर्ग में 8 महीने में 178 की मौत, सड़क किनारे खड़े भारी वाहन और मवेशी बने हादसों की बड़ी वजह

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सड़क हादसों में पिछले 8 महीने में 178 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले पांच दिनों में ही 3 अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की जान गई है। सितंबर की बात करें तो अब तक 6 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। इन हादसों में सड़क किनारे खड़े भारी वाहन और सड़कों पर घूमते मवेशी भी बड़ी वजह बन रहे हैं।

सामने आए मामलों में सड़क पर खड़े ट्रक, ट्रेलर और ट्रैक्टर से टकराने के साथ ही मवेशी को बचाने के दौरान हुए हादसों में लोगों की मौत हुई है। जेवरा-सिरसा, नंदिनी रोड, हथखोज, ट्रांसपोर्ट नगर-सिकोला और नेशनल हाईवे के किनारे भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग की स्थिति बनी हुई है। इसके बावजूद नियमित कार्रवाई और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सड़क पर घूमते मवेशियों को हटाने और भारी वाहनों की पार्किंग पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हादसों का खतरा बना हुआ है।

जनवरी से अगस्त 2026 तक सड़क दुर्घटनाओं में 178 लोगों की मौत हुई है। वहीं सितंबर में अब तक सड़क हादसों में 6 लोगों की जान जा चुकी है। इस महीने की शुरुआत में 3 सितंबर को नेशनल हाईवे पर कोसनाला टोल प्लाजा के पास सड़क हादसे में रेलवे कर्मचारी रविशंकर भारती (56) की मौत हुई थी। इसके बाद 6 सितंबर को सुपेला थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो के टकराने से दो युवकों की मौत हो गई। वहीं 12 और 15 सितंबर को हुए तीन अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।

15 सितंबर को झीट-मोतीपुर क्षेत्र में दो अलग-अलग सड़क हादसों में दो युवकों की मौत हो गई। पहला हादसा बाइक के सामने अचानक गाय आने के बाद हुआ। बाइक गाय से टकरा गई। हादसे में बाइक चालक और गाय दोनों की मौत हो गई। इसी दिन मोतीपुर में बाइक सड़क किनारे लगी फेंसिंग से टकरा गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हुए।

12 सितंबर की रात करीब 8:35 बजे मोहन नगर थाना क्षेत्र के उरला बाईपास पर बाइक खड़े ट्रेलर से टकरा गई। कादंबरी नगर निवासी योगेश कुमार साहू (33) कोटनी से दुर्ग लौट रहा था। बाईपास टोल प्लाजा के पास उसकी बाइक (CG 07 CX 5773) सड़क पर खड़े ट्रेलर (NL 01 AJ 5477) से टकरा गई। हादसे में योगेश को गंभीर चोटें आईं। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि ट्रेलर मुख्य सड़क पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बिना खड़ा था। जांच के बाद मोहन नगर पुलिस ने ट्रेलर चालक के खिलाफ धारा 106(1) बीएनएस और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

16 जुलाई को कुम्हारी क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडर लदे ट्रैक्टर से स्कूटी टकरा गई। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा घायल हुआ। बताया गया कि ऑक्सीजन सिलेंडर लदा ट्रैक्टर अक्सर इसी तरह सड़क किनारे खड़ा रहता था। हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच बिना पर्याप्त सुरक्षा संकेत के खड़ा भारी वाहन दुर्घटना का कारण बन सकता है।

जेवरा-सिरसा मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा है। कई जगह ट्रक सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। इससे सड़क की जगह कम हो जाती है और दूसरे वाहनों को खड़े ट्रकों को पार करने के लिए लेन बदलनी पड़ती है। छावनी थाना क्षेत्र के नंदिनी रोड पर भी सड़क किनारे भारी वाहन खड़े होने की समस्या है। औद्योगिक क्षेत्र से आने-जाने वाले ट्रकों की संख्या अधिक होने से सड़क पर पार्किंग का दबाव बना रहता है। हथखोज क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा है। सड़क किनारे खड़े ट्रकों से यातायात प्रभावित होता है। रात में बिना रिफ्लेक्टर या पार्किंग लाइट के खड़े वाहन हादसे का खतरा और बढ़ा देते हैं।

ट्रांसपोर्ट नगर और सिकोला क्षेत्र में मालवाहक वाहनों की आवाजाही और लोडिंग-अनलोडिंग के कारण सड़क पर दबाव रहता है। सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों से सामान्य यातायात प्रभावित होता है। नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार ज्यादा होती है। ऐसे में सड़क किनारे खड़ा ट्रक या ट्रेलर अचानक सामने आने पर हादसे का कारण बन सकता है। रात में बिना पार्किंग लाइट और रिफ्लेक्टर के खड़े वाहनों से खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई मार्गों पर मवेशी सड़क पर आ जाते हैं। अचानक सामने आए मवेशियों से बचने के दौरान बाइक और कार चालक नियंत्रण खो देते हैं, जिससे हादसे हो सकते हैं।

दूसरी तरफ पुलिस विभाग के आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में इस साल सड़क हादसों में मौत का आंकड़ा कम हुआ है। पिछले साल जनवरी से अगस्त तक 8 महीने में 247 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल जनवरी से अगस्त 2026 तक 178 लोगों की मौत हुई है। पुलिस के अनुसार हेलमेट और सीट बेल्ट की चेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और ब्लैक स्पॉट, हादसे वाले स्थानों पर निगरानी के कारण सड़क हादसों में कमी आई है।

इससे जुड़ी एक अन्य खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में सड़क हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने लगातार बढ़ रहे हादसों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना है? हाईकोर्ट ने NHAI और कलेक्टर्स से शपथपत्र मांगा है।

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