छत्तीसगढ़

‘चूहे खा गए 23 लाख का धान…’, समिति प्रबंधक की ‘अजीब’ दलील पर बिलासपुर हाई कोर्ट का राहत से इनकार


बिलासपुर में सहकारी समितियों में धान खरीदी के दौरान लाखों रुपये की धान की कमी के मामले में समिति प्रबंधकों की अजीबोगरीब दलीलों को हाईकोर्ट ने फिलहाल र …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 05 Jun 2026 03:29:08 PM (IST)Updated Date: Fri, 05 Jun 2026 03:29:46 PM (IST)

'चूहे खा गए 23 लाख का धान...', समिति प्रबंधक की 'अजीब' दलील पर बिलासपुर हाई कोर्ट का राहत से इनकार
समिति प्रबंधक की ‘अजीब’ दलील पर हाई कोर्ट का राहत से इनकार

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने सेवा सहकारी समिति प्रबंधक की याचिका की खारिज
  2. ऐसा होने पर 23 लाख के धान घोटाले की जांच जारी रहेगी
  3. हाई कोर्ट ने कहा- जमानत के लिए जाइए, जांच तो होगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सहकारी समितियों में धान खरीदी के दौरान लाखों रुपये की धान की कमी के मामले में समिति प्रबंधकों की अजीबोगरीब दलीलों को हाईकोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी है। दुर्ग जिले के कुम्हाली स्थित सेवा सहकारी समिति में 23 लाख रुपये से अधिक की धान और बारदानों की कमी के मामले में प्रबंधक द्वारा दायर याचिका को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि धान ‘चूहे खा गए’, उसमें ‘कीटों का प्रकोप’ था और ‘अत्यधिक सूखापन’ के कारण वजन घट गया, लेकिन कोर्ट ने इसे जांच का विषय मानते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। खाद्य और सहकारिता विभाग द्वारा 23 अप्रैल 2026 को किए गए भौतिक सत्यापन में कुम्हाली समिति में 690.70 क्विंटल धान और 3,057 बारदानों की भारी कमी पाई गई थी।

इसका बाजार मूल्य लगभग 23.54 लाख रुपये है। इस मामले में समिति प्रबंधक अतुल कुमार वर्मा के खिलाफ धारा 316(5) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में बचाव के लिए तर्क दिया कि धान की कमी के पीछे कोई आपराधिक मंशा नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक और अपरिहार्य कारणों का परिणाम है।

सूखापन: जलवायु परिस्थितियों के कारण धान में अत्यधिक नमी का ह्रास हुआ।

कीटों और चूहों का तांडव: लंबे समय तक धान का उठाव न होने के कारण गोदामों में कीट लग गए और चूहों ने धान को नष्ट कर दिया।

बारदानों की गुणवत्ता: सरकारी बारदानों की स्थिति अत्यंत जर्जर थी, जिससे अनाज का रिसाव होता रहा।

आपराधिक जांच को शुरुआत में नहीं रोका जा सकता

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि, “यह जांच का विषय है कि क्या कमी वास्तव में प्राकृतिक कारणों से हुई या यह लापरवाही और गबन का मामला है।”



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