छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिली मंजूरी, 16 साल का संघर्ष लाया रंग, अब पटरियों पर दौड़ेगी उम्मीद


नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिली स्वीकृति ने 16 वर्षों पुराने जनआंदोलन को नई पहचान दे दी है। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का आभार जताया है। साथ ही समिति ने स्पष्ट किया कि परियोजना तभी सार्थक होगी, जब संशोधित एलाइनमेंट और लूप लाइनों के माध्यम से अधिकतम आबादी को रेल सुविधा का लाभ मिल सके।

एक लंबे संघर्ष की कहानी

कटघोरा से डोंगरगढ़ रेल लाइन की स्वीकृति के साथ एक लंबे संघर्ष की कहानी फिर चर्चा में है। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को धन्यवाद दिया है। समिति ने मांग रखी है कि परियोजना में उसलापुर से गनियारी तथा खैरागढ़ से राजनांदगांव तक लूप लाइन भी शामिल की जाए, ताकि मालगाड़ियों के साथ यात्री रेल सेवाओं का भी विस्तार हो सके। समिति का कहना है कि बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई और रायपुर के बीच बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है, इसलिए परियोजना का स्वरूप जनहित आधारित होना चाहिए।

समिति ने याद दिलाया कि वर्ष 2009 में बिलासपुर से मुंगेली, कवर्धा होते हुए डोंगरगढ़ तक रेल लाइन की मांग को लेकर नौ दिवसीय साइकिल यात्रा निकाली गई थी। इसके बाद रेल मंत्री ममता बनर्जी ने पहला सर्वे स्वीकृत किया। संसद भवन में दिलीप सिंह जूदेव, रमेश बेस, पुन्नू लाल मोहले, मधुसूदन यादव सहित छात्र युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी थी।

वर्ष 2018 में स्वीकृत हुई परियोजना

वर्ष 2018 में परियोजना स्वीकृत हुई, लेकिन एलाइनमेंट बदलने से लोरमी, पंडरिया और बिलासपुर क्षेत्र प्रभावित हुए। बाद में पंडरिया में दो वर्षों तक आंदोलन चला। भूपेश बघेल सरकार ने एलाइनमेंट बदलने की मांग की, जिसे तत्कालीन केंद्र सरकार ने स्वीकार नहीं किया। वर्ष 2024 के बाद केंद्रीय मंत्री बने तोखन साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ मिलकर परियोजना को फिर गति दिलाई।

2009 की साइकिल यात्रा बनी आंदोलन की नींव

रेल लाइन की मांग केवल ज्ञापनों तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2009 में छात्र युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति ने बिलासपुर से मुंगेली, कवर्धा होते हुए डोंगरगढ़ तक नौ दिन की साइकिल यात्रा निकाली। गांव-गांव पहुंचकर लोगों को इस रेल परियोजना के महत्व से जोड़ा गया। यही अभियान आगे चलकर इस रेल लाइन के पहले सर्वे और जनसमर्थन का मजबूत आधार बना।

संशोधित एलाइनमेंट से लाखों लोगों को मिलेगा लाभ

समिति ने मांग की है कि तखतपुर से कवर्धा के बीच एलाइनमेंट इस प्रकार तय किया जाए कि मुंगेली, लोरमी, पंडरिया, कुंडा, पांडातराई और पोंडी जैसे प्रमुख कस्बे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएं। यदि रेलवे स्टेशन इन क्षेत्रों से 15 किलोमीटर के भीतर बनते हैं तो पूरे उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

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पुराने सर्वे के बजाय नए भूगोल पर हो फैसला

समिति का कहना है कि वर्ष 2012 के सर्वे और 2018 के एलाइनमेंट के बाद क्षेत्र में व्यापक बदलाव हो चुके हैं। नई बस्तियां, सड़कें और निर्माण कार्य बढ़े हैं। ऐसे में अंतिम लोकेशन सर्वे वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार किया जाना चाहिए। इससे निर्माण संबंधी बाधाएं कम होंगी और परियोजना का लाभ अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंचाने वाला व्यावहारिक मार्ग तय किया जा सकेगा।



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