छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में अब होटलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और आवासीय कॉलोनियों को खुद करनी होगी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था


राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब होटलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बड़ी आवासीय कॉलोनियों और अन्य बड़े कचरा उत्पादकों को अपने परिसरों में ही गीले कचरे के निपटान के लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस जैसी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी।

यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें नगरीय निकाय से विशेष अनुमति लेनी होगी और निर्धारित शुल्क या जुर्माना देना पड़ सकता है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक अप्रैल से बड़े कचरा उत्पादकों पर सख्ती बढ़ा दी है।

सख्ती से लागू कराने के दिशा-निर्देश जारी

विभाग की ओर से सभी आयुक्तों और नगरपालिका अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को सख्ती से लागू कराने के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए नियम के तहत पहली बार नगरीय निकाय के कार्यों के लिए जिला कलेक्टरों को भी जिम्मेदारी दी गई है।

ऑडिट कलेक्टर करेंगे, रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी

सभी जिलों के निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपलब्ध अधोसंरचना का ऑडिट कलेक्टर करेंगे, जिसकी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी। सरकार का मानना है कि जो संस्थान अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें उसके वैज्ञानिक निपटान की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए।

इससे न केवल शहरों से कचरे का बोझ कम होगा, बल्कि संसाधनों के पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

चार श्रेणियों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन

ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण चार श्रेणियों गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट में किया जाना अनिवार्य है। यह व्यवस्था स्रोत स्तर पर ही कचरे को अलग करने पर आधारित है, ताकि बाद की पूरी श्रृंखला अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बन सके। नगरीय निकायों से ठोस अपशिष्ट के निष्पादन के लिए सुविधाओं की स्थिति की जानकारी भी मांगी गई है।

अधिकारी भी होंगे जिम्मेदार

निर्देश में कहा गया है कि नियमों का पालन नहीं होने पर अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे। प्रारंभिक क्रियान्वयन न करने की स्थिति में बल्क वेस्ट जनरेट व नगरीय निकाय पर तत्काल अर्थ दंड लगाया जाएगा। लगातार क्रियान्वय न होने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई होगी।

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एमआरएफ स्थापित करने के निर्देश

नगरीय निकायों को अधोसंरचना सुदृढ़ करने, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) स्थापित करने और चार-कक्षीय कचरा संग्रहण वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पुराने डंपसाइट्स यानी लीगेसी वेस्ट के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। एमआरएफ केंद्रों में सूखे कचरे की छंटाई, वर्गीकरण और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की रिकवरी की जाती है।



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