छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, आपसी सहमति से बने संबंध दुष्कर्म नहीं, आरोपी की बरी बरकरार

दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया है।

HighLights
- हाई कोर्ट ने कहा, बालिग महिला की सहमति से बने संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता
- ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा
- मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने पर पीड़िता की अपील खारिज
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि यदि पीड़िता बालिग है और कृत्य के परिणामों को जानते हुए उसमें शामिल होती है, तो उसे सहमति माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने पीड़िता की अक्विटल अपील खारिज कर दी। यह फैसला न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की डिवीजन बेंच ने सुनाया।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
मामला सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित मणिपुर चौकी क्षेत्र का है। 40 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया था कि 15 जून 2018 की रात शौचालय से लौटते समय आरोपी रामेश्वर दास ने उसे जान से मारने की धमकी देकर मारपीट की और दुष्कर्म किया। मामले की सुनवाई के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट, सरगुजा ने 28 जनवरी 2022 को आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
साक्ष्यों में सहमति के संकेत मिले
हाई कोर्ट ने पीड़िता के न्यायालय में दिए गए बयान और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घटना के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई थी और उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के कैनी राजन बनाम केरल राज्य फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सहमति केवल मूक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया निर्णय होती है।
मेडिकल रिपोर्ट में नहीं हुई पुष्टि
अदालत ने यह भी माना कि 40 वर्षीय पीड़िता, जो तीन बच्चों की मां है, उसे अपने कृत्य के परिणामों और सामाजिक प्रभाव की पूरी जानकारी थी। वहीं डॉ. रोजलिन आर. एक्का की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई। रिपोर्ट में दर्ज चोटें भी कथित घटना के समय से मेल नहीं खाती थीं।



