बिलासपुर में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पांचवां आरोपित गिरफ्तार

अधिकारियों का कहना है कि गिरोह भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में करता था। मामले की जांच अभी जारी ह …और पढ़ें

HighLights
- जांच में सामने आया है कि गिरोह देश के कई राज्यों में सक्रिय था।
- संदिग्ध रकम विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से संचालित की जा रही थी।
- शेयर ट्रेडिंग में 17.21 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद अब पुलिस ने पांचवें आरोपित को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह देश के कई राज्यों में सक्रिय था और साइबर अपराध से जुड़ी करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से संचालित की जा रही थी।
सीएसपी गगन कुमार(आइपीएस) ने बताया कि नर्मदा नगर कॉलोनी में रहने वाली एक महिला को शेयर ट्रेडिंग में अधिक लाभ का झांसा देकर अलग-अलग दिन 17.21 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी।
शिकायत मिलने पर साइबर थाना ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपित तक पहुंच बनाई। पुलिस ने पूर्व में मुकेश कुमार दास, केशव साव, संदीप कुमार चंद्रा उर्फ विक्की और शिशिर राठौर को गिरफ्तार किया गया था।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के अहम सदस्य रजत तोमर(32) निवासी शिवाजी नगर खुर्सीपार, भिलाई, जिला दुर्ग तथा स्थायी निवासी ग्राम सुप, थाना रमाला, जिला बागपत (उत्तर प्रदेश) को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित के बैंक खातों के खिलाफ गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और दिल्ली सहित कई राज्यों में साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपित से जुड़े खातों में लाखों रुपये होल्ड कराए हैं तथा एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी जब्त किए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि गिरोह भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में करता था। मामले की जांच अभी जारी है और अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
आरोपित खातों से जुड़े मिले आठ करोड़ के संदिग्ध लेन-देन
- जांच के दौरान आरोपित मुकेश कुमार दास के तीन बैंक खातों के खिलाफ 13 साइबर शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। इनमें इंडसइंड बैंक खाते में तीन, एक्सिस बैंक खाते में छह और इंडियन ओवरसीज बैंक खाते में चार शिकायतें शामिल हैं।
- इन शिकायतों से संबंधित संदिग्ध लेन-देन की कुल राशि लगभग आठ करोड़ रुपये पाई गई है।
- पुलिस के अनुसार साइबर अपराध से संबंधित करीब 10 लाख रुपये सीधे मुकेश के खातों में प्राप्त हुए थे, जिन्हें बाद में विभिन्न खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया गया।
- आरोपित केवल खाताधारक नहीं बल्कि साइबर ठगी से मिले रुपयों के ट्रांजेक्शन नेटवर्क का हिस्सा थे। एनसीआरपी पोर्टल से प्राप्त जानकारी ने जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी।
99 लाख रुपये होल्ड, खातों के जरिए होता था रुपयों का ट्रांसफर
- रेंज साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित केशव साव के एक्सिस बैंक खाते में लगभग 99 लाख रुपये होल्ड कराए हैं।
- वहीं शिशिर राठौर के खाते में मौजूद लगभग एक लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं।
- जांच में पता चला कि गिरोह साइबर अपराध से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों में जमा कर उसे आगे स्थानांतरित करता था।
- पुलिस का मानना है कि बैंक खातों का इस्तेमाल मनी ट्रेल छिपाने और रकम को कई स्तरों पर घुमाने के लिए किया जाता था।
- खातों में मिले लेन-देन और एनसीआरपी पोर्टल से प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुलिस अब अन्य खातों और संभावित सहयोगियों की भी जांच कर रही है।
बैंक खाते जुटाने और नेटवर्क फैलाने का जिम्मा संभालता था रजत
- गिरफ्तार आरोपित रजत तोमर की भूमिका जांच में बेहद महत्वपूर्ण पाई गई है। पुलिस के अनुसार वह साइबर ठगी नेटवर्क के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने, खाताधारकों को लालच देकर गिरोह से जोड़ने और साइबर अपराध से मिले रुपयों के लेन-देन को व्यवस्थित करने का काम करता था।
- जांच में पता चला कि वह लोगों को अधिक कमाई का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते हासिल करता था।
- कई मामलों में खाताधारकों को दिल्ली सहित अन्य स्थानों तक ले जाकर उनके खातों का उपयोग करवाता था। पुलिस को सूचना मिली थी कि रजत दुर्ग से उत्तर प्रदेश भागने की तैयारी में है।
- इसके बाद योजनाबद्ध कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।




