छत्तीसगढ़
Bilaspur High Court: 70 साल पुराने जमीन विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला, दूसरी अपील खारिज, जानें पूरा मामला


याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि, जमीन केवल आश्रम निर्माण के उद्देश्य से दी गई थी, कोई वास्तविक कीमत नहीं दी गई। आश्रम कभी बनाया ही नहीं गया। इसलिए यह बिक्री विलेख शून्य माना जाए। प्रतिवादियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि, 1952 की रजिस्ट्री पूरी तरह वैध और मूल्य लेकर की गई थी। इसमें कोई शर्त नहीं थी कि आश्रम बनाना अनिवार्य है, जमीन पर उनका कजा और स्वामित्व वर्षों से बना हुआ है। वहीं, ट्रायल कोर्ट और प्रथम अपीलीय न्यायालय दोनों ने बिक्री विलेख को वैध माना।




