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बिलासपुर के गतौरा में बीदर त्योहार के दौरान हिंसक झड़प, लाठी-डंडों से हमले में 30 वर्षीय युवक की मौत

बिलासपुर के मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम गतौरा में रविवार रात स्थानीय बीदर त्योहार के दौरान दो पक्षों के बीच हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच मारपीट के दौरान एक पक्ष के लोगों ने तीन लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल 30 वर्षीय युवक की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़ा भाई गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों का सिम्स बिलासपुर में उपचार चल रहा है। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

एएसपी मधुलिका सिंह ने बताया कि गतौरा के वार्ड क्रमांक 19 स्थित जनक पहरी पारा में रविवार को बीदर त्योहार मनाया जा रहा था। रात करीब 11 बजे के आसपास किसी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच मारपीट होने लगी।

इसी दौरान एक पक्ष के लोगों ने व्यासनारायण राठौर (60), उनके बड़े बेटे रवि कुमार राठौर (36) और छोटे बेटे शैलेश कुमार राठौर (30) पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर स्वजन मौके पर पहुंचे और घायलों को उपचार के लिए सिम्स लेकर आए। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद शैलेश कुमार राठौर को मृत घोषित कर दिया। वहीं व्यासनारायण राठौर और रवि कुमार राठौर का उपचार जारी है। दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलने के बाद सोमवार को पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। एडिशनल एसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह, एसडीओपी सुदीप सरकार और मस्तूरी थाना प्रभारी कपिल देव चंद्रा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से घटना की जानकारी ली और विवाद के कारणों की जांच शुरू की।

पुलिस ने मामले में दूसरे पक्ष के लोगों समेत करीब 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत किस बात को लेकर हुई और हमले में किन लोगों की प्रत्यक्ष भूमिका रही। पुलिस घटनास्थल से जुड़े अन्य लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।

स्थानीय पर्व के दौरान हुई इस हिंसक घटना से गतौरा गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गांव में ग्राम देवता को बलि देने की परंपरा है। गांव के लोग स्थानीय परम्परा के अनुरूप एक दिन तय कर हर समाज की ओर से अलग-अलग पशुओं की बलि देते हैं। यह पर्व हर गांव में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

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