राजनीति

भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी, गोमती साय गुजरात और सौरभ सिंह झारखंड के सह-प्रभारी बने

भाजपा के 23 सितंबर के संगठनात्मक फेरबदल में छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी मिली है। पत्थलगांव विधायक गोमती साय को गुजरात का सह-प्रभारी और अकलतरा के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी बनाया गया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ के नेताओं को प्रदेश से बाहर भेजा गया है। इससे पहले करुणा शुक्ला, सरोज पांडे, रामविचार नेताम और लता उसेंडी भी दूसरे राज्यों की टीम में रह चुके हैं। इनमें रामविचार नेताम का नाम खास है, क्योंकि उन्हें एक बार नहीं, बल्कि झारखंड में सह-प्रभारी और बाद में प्रभारी की भूमिका मिली।

छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं में करुणा शुक्ला का नाम शुरुआती दौर में आता है। 2007 में भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें झारखंड का प्रभारी बनाया गया था। 2009 में भी वे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए झारखंड की पार्टी प्रभारी थीं। झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद दिसंबर 2009 में वे केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर पार्टी विधायकों की बैठक में भी शामिल हुई थीं। करुणा शुक्ला करीब 32 साल तक भाजपा से जुड़ी रहीं और पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई जिम्मेदारियां संभालीं। वे 2004 में जांजगीर लोकसभा सीट से सांसद भी चुनी गई थीं। अक्टूबर 2013 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ महीनों बाद फरवरी 2014 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली। उस समय उन्होंने भाजपा में उपेक्षा किए जाने की बात कही थी। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव बिलासपुर से लड़ा। इस तरह करुणा शुक्ला का राजनीतिक सफर भाजपा के संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से लेकर दूसरे दल में जाने तक का रहा। 2021 में उनका निधन हो गया।

सरोज पांडेय को जुलाई 2015 में भाजपा अध्यक्ष रहते अमित शाह ने संगठन में बदलाव करते हुए तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय को महाराष्ट्र भाजपा की जिम्मेदारी दी थी। उस समय वे छत्तीसगढ़ से सांसद थीं और भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय थीं। भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया था। सरोज पांडेय की जिम्मेदारी केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं रही। 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे भाजपा की महाराष्ट्र प्रभारी के रूप में सक्रिय थीं। इस लिहाज से सरोज पांडे का नाम छत्तीसगढ़ के उन नेताओं में दर्ज होता है जिन्हें दूसरे बड़े राज्य की नियमित संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली। हालांकि अभी हुई नई नियुक्तियों में उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

रामविचार नेताम को साल 2015 में अमित शाह की राष्ट्रीय टीम में भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। इसके बाद झारखंड में भी उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली। 2016 में उन्हें झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया था। उस समय वे छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद थे। चुनाव से पहले झारखंड में एक महीने से अधिक समय तक रहे और विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था। यानी रामविचार नेताम के रिकॉर्ड में दूसरे राज्य की जिम्मेदारी का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण मिलता है, पहले उन्हें सह-प्रभारी बनाया गया और साल 2019 में प्रभारी।

कोंडागांव से विधायक और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकीं लता उसेंडी को 2024 में ओडिशा भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया था। जनवरी 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए थे। उस सूची में ओडिशा के चुनाव प्रभारी विजयपाल सिंह तोमर तो सह-प्रभारी लता उसेंडी थीं। इसके कुछ महीने बाद जुलाई 2024 में भाजपा ने राज्यों के नियमित प्रभारी और सह-प्रभारी घोषित किए। इसमें भी विजयपाल सिंह तोमर को ओडिशा का प्रभारी और लता उसेंडी को सह-प्रभारी रखा गया। इस तरह लता उसेंडी का नाम सिर्फ चुनावी जिम्मेदारी वाले रिकॉर्ड में ही नहीं, बल्कि नियमित राज्य सह-प्रभारी की सूची में भी आता है। 2026 के नए फेरबदल में हालांकि ओडिशा की टीम बदल गई। 23 सितंबर 2026 की नई सूची में डी. पुरंदेश्वरी को ओडिशा का प्रभारी और स्वदेश सिंह को सह-प्रभारी बनाया गया। यानी लता उसेंडी अब उस सूची में नहीं हैं।

अब 2026 में दो नए नाम जुड़े हैं। 23 सितंबर 2026 को भाजपा ने देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई सूची जारी की। इसमें छत्तीसगढ़ की पत्थलगांव विधायक और रायगढ़ की पूर्व सांसद गोमती साय को गुजरात भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। गुजरात में तरुण चुघ प्रभारी हैं और अजय महावर के साथ गोमती साय सह-प्रभारी हैं। गोमती साय का राजनीतिक सफर पंचायत स्तर से शुरू हुआ। वे जशपुर जिला पंचायत की सदस्य और बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। 2019 में वे रायगढ़ से लोकसभा सांसद चुनी गईं और 2023 में पत्थलगांव से विधानसभा पहुंचीं। अब उनके राजनीतिक सफर में एक और संगठनात्मक जिम्मेदारी जुड़ी है, छत्तीसगढ़ से बाहर गुजरात भाजपा के संगठन में काम करना।

इसी फेरबदल में दूसरा छत्तीसगढ़िया नाम सौरभ सिंह का है। अकलतरा के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। झारखंड में गजेंद्र पटेल प्रभारी हैं, जबकि सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह सह-प्रभारी हैं। सौरभ सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। 2008 में वे पहली बार विधायक बने। बाद में भाजपा में आए और 2018 में अकलतरा से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार मिली। अब भाजपा संगठन ने उन्हें झारखंड की टीम में सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी है। उनकी प्रोफाइल में एक और फैक्ट है कि वे 1998 और 1999 में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू तक पहुंचे थे। राजनीतिक जीवन में अब झारखंड की संगठनात्मक जिम्मेदारी उनकी पॉलिटिकल प्रोफाइल का एक नया एपिसोड है।

भाजपा ने 23 सितंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संगठनात्मक प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियां कीं। इसमें छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को दी गई है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ शंभू को प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया है। दोनों नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। नितिन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी का पद खाली था। अब पार्टी ने स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू की नियुक्ति के साथ यह जिम्मेदारी तय कर दी है। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ के साथ हरियाणा का भी प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शंभू इससे पहले बिहार भाजपा में प्रदेश मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

इससे जुड़ी अन्य खबरों के अनुसार, स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। उन्हें हरियाणा का भी प्रभार दिया गया है, जबकि सिद्धार्थ शंभू को सह प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले भाजपा की नई टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। संगठनात्मक राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा थी। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ का संगठन महामंत्री बनाया है। इससे पहले कर्मवीर झारखंड के संगठन महामंत्री थे। वहीं, वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री रहे पवन साय को झारखंड भाजपा के संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

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