छत्तीसगढ़

बदलेगा छत्तीसगढ़ का राजनीतिक भूगोलः जनगणना और परिसीमन के बाद बढ़ेंगी विधानसभा और लोकसभा की सीटें


संदीप तिवारी, नईदुनिया, रायपुर। सूबे की सियासत में आने वाले कुछ वर्ष बड़े बदलावों के गवाह बनने वाले हैं। आगामी राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से प्रदेश का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा।

वर्तमान में 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा का स्वरूप विस्तार पाकर 120 सीटों तक पहुंचने की प्रबल संभावना है। केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों की संख्या में भी वृद्धि होगी।

इस बदलाव से न केवल क्षेत्रों की सीमाएं बदलेंगी, बल्कि कई दशकों से जमे-जमाए राजनीतिक और जातिगत समीकरण भी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे।

डिजिटल मॉडल पर आधारित होगी 2027 की जनगणना

प्रशासन ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया ‘डिजिटल मॉडल’ पर आधारित होगी। डेटा जुटाने के लिए कागजी दस्तावेजों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी आनलाइन भरने का विकल्प भी मिलेगा।

दो चरणों में संपन्न होगी जनगणना

पहले चरण में भवनों की गिनती, उनके उपयोग (आवासीय या कार्यालय) और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दर्ज की जाएगी। प्रत्येक 180 से 200 भवनों पर एक प्रगणक नियुक्त होगा।

दूसरे चरण में जनसंख्या गणना

दूसरे चरण में सामान्य, संस्थागत और बेघर परिवारों के सदस्यों की विस्तृत गणना की जाएगी। रायपुर सहित कई निकायों ने इसके लिए मकानों की नंबरिंग शुरू कर दी है।

90 से 120: विधानसभा सीटों का गणित

वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद 2003 से छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 90 बनी हुई है। हालांकि, संशोधित अनुच्छेद 82 के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर नया परिसीमन किया जाना है।

जानकारों का मानना है कि प्रदेश में करीब 30 नई विधानसभा सीटें जुड़ सकती हैं और लोकसभा सीटों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होगी। महिला आरक्षण बिल के लागू होने के बाद प्रदेश की करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।

परिसीमन के लिए केंद्र सरकार 2025 में एक आयोग का गठन कर सकती है, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या वरिष्ठ आइएएस अधिकारी करेंगे।

बस्तर संभाग और क्षेत्रीय बदलाव की आहट

आगामी परिसीमन का सबसे बड़ा प्रभाव बस्तर संभाग में देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यहां 12 विधानसभा और दो लोकसभा (बस्तर व कांकेर) सीटें हैं। बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में कांकेर लोकसभा में आते हैं।

नए परिसीमन में बालोद जिला कांकेर लोकसभा से अलग होकर किसी अन्य क्षेत्र का हिस्सा बन सकता है। बस्तर संभाग के भीतर चार से छह नई विधानसभा सीटें बढ़ने की संभावना है। इससे आदिवासियों के लिए आरक्षित और अनारक्षित सीटों के समीकरण भी बदल सकते हैं।

छत्तीसगढ़ का राजनीतिक सफर

1951 से अब तक छत्तीसगढ़ का राजनीतिक सफर मध्य प्रांत और बरार (1950 तक) से शुरू हुआ। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद 1951 के पहले चुनाव में यहां 61 सीटें थीं। समय के साथ परिसीमन ने कई सीटों को समाप्त किया और कई नई सीटें जन्मीं। अब तक कुल छह बार परिसीमन किया जा चुका है और यह सातवां परिसीमन होगा।

वर्ष और विधानसभा सीटें

1951 61
1957 57
1962 81
1967 83
2003 90
2008 90

अस्तित्व खोने वाली प्रमुख सीटें

सूरजपुर, पाल, पिलखा, बगीचा, तपकरा, सरिया, जरहागांव, सिपत, पामगढ़, मालखरोदा, रायपुर शहर, मंदिर हसौद, पल्लारी, भटगांव, भानपुरी, केसलूर, मारो, धमधा, खेरथा, चौकी और विरेन्द्र नगर। अस्तित्व में आई नई सीटें- भरतपुर-सोनहट, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज, कुनकुरी, कोरबा, बेलतरा, जैजैपुर, पामगढ़, बिलाईगढ़, रायपुर पश्चिम, रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, दुर्ग ग्रामीण, वैशाली नगर, अहिवारा, नवागढ़, पंडरिया, मोहला-मानपुर, अंतागढ़ और बस्तर।

जातिगत समीकरणों पर प्रभाव

1951 में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान छत्तीसगढ़ की 61 सीटों में से केवल आठ अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित थीं। 1957 से अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षण शुरू हुआ। वर्तमान में विधानसभा में 29 सीटें एसटी और 10 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

नए परिसीमन के बाद जनसंख्या के अनुपात के अनुसार इन आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ सकती है या कई आरक्षित सीटें अनारक्षित श्रेणी में भी शामिल हो सकती हैं।

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क्या है परिसीमन

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, परिसीमन का शाब्दिक अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करना। सामान्यत: जनगणना के बाद परिसीमन किया जाता है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा दोनों क्षेत्रों की सीमा तय होती है।

राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, 2027 की जनगणना और उसके बाद का परिसीमन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सत्ता की चाबी का नया खाका तैयार करेगा। राजनीतिक दलों ने अभी से इन संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपनी भविष्य की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

अभी जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया होगी।

– यशवंत कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़



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