बदली महानदी की धारा, 400 एकड़ जमीन भी बंजर, हाई कोर्ट ने खनिज सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के दिए निर्देश

Bilaspur News: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के नेतृत्व वाली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रायपुर के निसदा में ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर के अवैध उत्खनन पर तत्क …और पढ़ें

HighLights
- माइनिंग वेस्ट डंप किए जाने पर याचिका दायर की गई
- ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर का उत्खनन होता है
- तीन साल पहले खत्म हुई पर्यावरणीय अनुमति
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के नेतृत्व वाली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने रायपुर के निसदा में ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर के अवैध उत्खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक के आदेश दिए हैं। यहां महानदी में माइनिंग वेस्ट डंप किए जाने पर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
नदी की धारा बदल देने और 400 एकड़ जमीन बंजर हो जाने के दावे को गंभीर मानते हुए बुधवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने खनिज सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
जनहित याचिका में क्या किया गया है दावा
राजधानी रायपुर से सटे निसदा गांव निवासी ओम प्रकाश सेन ने जनहित याचिका में दावा किया कि गांव में स्वीकृत क्षेत्र से पांच गुना जमीन में उत्खनन के कारण करीब 400 एकड़ जमीन बंजर हो गई। यहां ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर का उत्खनन होता है।
उत्खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए
याचिका पर सुनवाई करते हुए की खंडपीठ ने लीज एरिया से बाहर हो रहे उत्खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी। हालांकि राज्य सरकार ने सात दोषी लीज धारकों पर 30 करोड़ रुपय का जुर्माना लगाए जाने का दावा किया है।
पांच गुना अधिक क्षेत्र में खनन
ओम प्रकाश सेन ने कोर्ट को बताया कि ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी। लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर उत्खनन किया। इस दौरान निकलने वाला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डंप किए जा रहे हैं। इसी से नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ और करीब 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर हो गई।
तीन साल पहले खत्म हुई पर्यावरणीय अनुमति
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया गया कि तीन साल पहले पर्यावरणीय अनुमति समाप्त हो चुकी है। बावजूद क्षेत्र में लीजधारक अवैध तरीके से उत्खनन और धड़ल्ले से ब्लास्टिंग कर रहे हैं।
सात लीजधारक दोषी, जुर्माना भी लगाया
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने खंडपीठ को बताया कि कलेक्टर ने खनिज विभाग से जांच कराई थी। सात लीजधारकों को दोषी पाया गया था। उन पर 30 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है। खंडपीठ ने नदी में माइनिंग वेस्ट डंप करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।




