छत्तीसगढ़

पैर दर्द का इलाज कराने आया था मासूम, अस्पताल की लापरवाही ने ली जान, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप


जिला अस्पताल से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैर में मामूली दर्द पर अस्पत …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 29 Apr 2026 10:29:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Apr 2026 10:31:09 PM (IST)

पैर दर्द का इलाज कराने आया था मासूम, अस्पताल की लापरवाही ने ली जान, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
पैर दर्द का इलाज कराने आया था मासूम, अस्पताल की लापरवाही ने ली जान

नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। जिला अस्पताल से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैर में मामूली दर्द पर अस्पताल पहुंचा तीन साल के मासूम लक्ष्य की इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल अधीक्षक को शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कर इलाज में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई की मांग की है।

स्टाफ पर उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का आरोप

खल्लारी थाना क्षेत्र के ग्राम चरौदा निवासी मृतक के पिता सतवन बांधे ने कहा कि पुत्र लक्ष्य के पैर में दर्द पर उसे 28 अप्रैल की सुबह जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां मौजूद डॉक्टर ने एक्स-रे कराने और खून चढ़ाने की सलाह तो दी, लेकिन इसके बाद बच्चे की समुचित देखभाल नहीं की। रात करीब 11 बजे उसका एक्स-रे और खून की जांच हुई। स्वजनों का आरोप है कि पूरी रात मासूम दर्द से कराहता रहा, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने न तो उसकी हालत पर ध्यान दिया और न ही कोई जरूरी इलाज मुहैया कराया। स्वजनों का आरोप है कि कर्मचारियों का रवैया पूरी तरह उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना रहा। सुबह होते-होते बच्चे की हालत गंभीर हो गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। स्वजनों ने अस्पताल प्रबंधन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए न्याय की मांग की है।

खून में फैल गया था इंफैक्शन-अस्पताल अधीक्षक। पैर दर्द की शिकायत को लेकर मृतक लक्ष्य बांधे को 28 अप्रैल की सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका इलाज जारी था और आज सुबह उसकी मौत हो गई। खून जांच में पता चला कि उसके खून में इंफैक्शन फैल गया था। इलाज में लापरवाही बरतने का स्वजनों का आरोप सरासर गलत है। उनके आवेदन पर जांच की जाएगी। अगर स्वजनों का अरोप सही पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. बसंत माहेश्वरी, अस्पताल अधीक्षक- शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला अस्पताल।

तालमेल की कमी और रेफरल सेंटर बना मेडिकल कॉलेज

बेलगाम है चिकित्सा व्यवस्था। मेडिकल कालेज हास्पिटल बनने के बाद भी जिले की सरकारी चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है। कुछ माह पहले जामगांव से आये एक बच्चे के पैर की हड्डी तक यहां जोड़ी नहीं जा सकी। उसे रायपुर रिफर किया गया, बाद निजी अस्पताल के चिकित्सक ने बच्चे का उपचार कर दिया। यहां के ज्यादातर चिकित्सक रायपुर से आना जाना करते हैं। सीएमएचओ, अस्पताल अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज के डीन के बीच तालमेल की कमी नजर आती है। जिससे अधीनस्थ मेडिकल स्टाफ पर प्रभावी नियत्रंण नहीं है।



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