छत्तीसगढ़

मोहसिना किदवई का किरदार:94 वर्षीय कांग्रेस नेत्री की पहचान बेहद खास, भारत के सियासी चौसर पर साबित की प्रतिभा – Mohsina Kidwai’s Character: This 94-year-old Congress Leader Has A Unique Identity


पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का बुधवार सुबह 94 साल की उम्र में निधन हो गया। वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। परिवार के अनुसार, मोहसिना किदवई का अंतिम संस्कार आज शाम करीब 5 बजे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित कब्रिस्तान में किया जाएगा।

संसद के दोनों सदनों में रहीं

मोहसिना किदवई देश की अनुभवी राजनेताओं में गिनी जाती थीं। उन्होंने राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। अपने राजनीतिक जीवन में वह लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य भी रहीं। इसके अलावा, वह कांग्रेस पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाइयों कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की सदस्य भी रह चुकी थीं।


उत्तर प्रदेश में हुआ जन्म



1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में जन्मी मोहसिना किदवई ने अपने जीवन को राजनीति और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनकी शुरुआती शिक्षा अलीगढ़ के विमेंस कॉलेज में हुई। वर्ष 1953 में उनका विवाह खलीलुर रहमान किदवई से हुआ।



राजनीतिक सफर की मजबूत शुरुआत



किदवई का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ। वह 1960 से 1974 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य रहीं। इसके बाद 1974 से 1977 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य बनीं। राज्य सरकार में उन्होंने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री (1973-74), हरिजन एवं समाज कल्याण मंत्री (1974-75) और लघु उद्योग मंत्री (1975-77) जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।



केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारियां



राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वह छठी और सातवीं लोकसभा की सदस्य रहीं। केंद्र में उन्होंने श्रम एवं पुनर्वास मंत्रालय में राज्य मंत्री (1982-83), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री (1983-84) के रूप में काम किया। बाद में उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। 31 दिसंबर 1984 से उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (कैबिनेट) के रूप में जिम्मेदारी संभाली।



कांग्रेस संगठन में मजबूत पकड़



मोहसिना किदवई कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता थीं। वह 1976 से 1980 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रहीं और 1982 में दोबारा इस पद पर नियुक्त हुईं। इसके अलावा, वह कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) और पार्टी की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की सदस्य भी रहीं।



समाज सेवा में विशेष योगदान



राजनीति के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए उन्होंने कई पहल कीं। बाराबंकी में नेशनल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, वयस्क महिलाओं की साक्षरता के लिए विशेष केंद्र, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण संस्थान और अनाथ व बेसहारा बच्चों के लिए “बाल जगत” जैसी संस्थाओं से वह जुड़ी रहीं। उनका मुख्य फोकस समाज के वंचित, कमजोर और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर रहा।



अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का किया प्रतिनिधित्व



मोहसिना किदवई ने कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, जर्मनी, केन्या, मॉरीशस, हंगरी, यूएई समेत कई देशों की यात्राएं कीं और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को मजबूती से रखा।



व्यक्तिगत रुचियां और जीवन दृष्टि



उन्हें साहित्य पढ़ने, महान व्यक्तित्वों की जीवनी जानने, संगीत और खेलों में गहरी रुचि थी। बैडमिंटन उनका पसंदीदा खेल था। वह जीवनभर सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करती रहीं।



मोहसिना किदवई का निधन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।





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